मैनपुरी में एक अधिवक्ता को कथित तौर पर गलत मुकदमे में फंसाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में कलेक्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मुलाकात की है। सदर कोतवाली में इस मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार, ज्योति जुर्द, मैनपुरी निवासी अधिवक्ता रामपाल सिंह के पुत्र मोदितनंदन का विवाह 29 नवंबर 2020 को कन्नौज के नगला महुआ निवासी रघुवीर की पुत्री रेवा के साथ बिना दहेज के हुआ था। शादी के कुछ समय बाद, रेवा के पिता रघुवीर सिंह ने बेटी और दामाद को अलग रहने को कहा। कुछ लोगों की मध्यस्थता से उन्हें अलग कर दिया गया और रामपाल सिंह अपने बच्चों के साथ गांव से एक किलोमीटर दूर दूसरे मकान में रहने लगे। बाद में जेवरात और लेन-देन को लेकर विवाद शुरू हो गया, जिसके बाद रघुवीर बिना बताए अपनी बेटी रेवा को वापस अपने घर ले गए। इसके जवाब में, रघुवीर ने जियरामऊ थाने में रामपाल सिंह और उनके बच्चों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया। इस मामले में रामपाल सिंह को मजबूरन हाईकोर्ट जाना पड़ा। लगभग तीन महीने पहले, हाईकोर्ट की मध्यस्थता के माध्यम से रेवा को वापस बुलाया गया था। तब से रेवा और मोदितनंदन पुराने मकान में रह रहे थे और रघुवीर का भी उनके घर आना-जाना लगा रहता था। इसके बाद रेवा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय अधिवक्ता रामपाल सिंह घर पर मौजूद नहीं थे। उनके दोनों बच्चे शहर मैनपुरी में किराए के मकान में रहकर बी.एस.टी. की पढ़ाई कर रहे हैं। अधिवक्ता रामपाल सिंह पर 31 दिसंबर को बेटे के ससुराल पक्ष द्वारा गलत तरीके से नाम शामिल कर मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस इस मामले की जांच भी कर चुकी है। सभी अधिवक्ताओं ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर अधिवक्ता रामपाल सिंह का नाम मुकदमे से हटाए जाने की मांग की है।
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