महोबा के मामना गांव में आवासीय संकट को लेकर लगभग 50 महिलाओं ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इन महिलाओं ने ग्राम समाज की खाली पड़ी ज़मीन पर आवासीय पट्टे आवंटित करने की मांग की है। महिलाओं का आरोप है कि परिवार बढ़ने के कारण उनके छोटे घरों में रहना मुश्किल हो गया है। कई परिवारों के पास रहने के लिए ज़मीन का कोई टुकड़ा नहीं है, जिससे उन्हें गंभीर आवासीय समस्या का सामना करना पड़ रहा है। मामना गांव की आशा रानी और प्यारी जैसी महिलाओं ने बताया कि गाँव में लगभग 40 ऐसे परिवार हैं जिनके पास अपनी ज़मीन नहीं है। एक ही कमरे में कई पीढ़ियों का गुज़र-बसर करना अब संभव नहीं हो पा रहा है। इन महिलाओं की मुख्य मांग है कि उन्हें ग्राम समाज की खाली पड़ी ज़मीन पर आवासीय पट्टे दिए जाएँ। उनका तर्क है कि इससे न केवल उन्हें अपने बच्चों के लिए सुरक्षित छत मिलेगी, बल्कि वे अपने मवेशियों को भी पाल सकेंगी, जो उनकी आजीविका का साधन हैं। महिलाओं का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से प्रशासन से गुहार लगा रही हैं, लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने तहसील प्रशासन पर बार-बार शिकायत पत्र देने के बावजूद चुप्पी साधने का आरोप लगाया। आज एक बार फिर इन महिलाओं ने जिलाधिकारी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पट्टों का आवंटन नहीं हुआ, तो वे अपने आंदोलन को और तेज़ करेंगी। अब देखना यह होगा कि महोबा प्रशासन इन बेघर परिवारों की पुकार सुनता है या फिर ये महिलां ऐसे ही सरकारी दफ्तरों की चौखट नापती रहेंगी।
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