एसआरएन अस्पताल के युवा कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. विमल निषाद, डॉ. वैभव श्रीवास्तव और डॉ. ऋषिका पटेल ने जटिल हृदय रोगों से जूझ रहे तीन मरीजों का सफल इलाज कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया। बिना सर्जिकल चीड़-फाड़ के सभी मरीजों का इलाज किया । पहले मरीज हैं कोरांव के 58 वर्षीय पुरुष, जो ब्लैडर आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन से पीड़ित थे। उनके हृदय में 32 मिमी का छेद (एएसडी) होने से कोई सर्जन ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं था। पिछले एक वर्ष से परेशान इस मरीज का डॉक्टरों की टीम ने 40 मिमी डिवाइस से बिना चीरा लगाए छेद सफलतापूर्वक बंद कर दिया। अब तीन महीने में उनका ब्लैडर सर्जरी सुरक्षित हो सकेगा। दूसरी मरीज फूलपुर की 52 वर्षीय महिला हैं, जिनके हृदय में 31 मिमी छेद के कारण दाहिना हृदय फेल हो चुका था और लीवर में कंजेशन की गंभीर समस्या हो रही थी। टीम ने दाहिनी जांघ की नस से 38 मिमी डिवाइस डालकर छेद बंद किया। चिकित्सकों के मुताबिक, 3-6 महीनों में हार्ट फेल्योर और लीवर की स्थिति में स्पष्ट सुधार होगा। दोनों मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। तीसरे मरीज हैं जारी के 25 वर्षीय युवक, जो तीन वर्षों से सांस फूलने और धड़कन की समस्या से जूझ रहे थे। पिछले तीन महीने से टीबी की दवा ले रहे थे, लेकिन कुंभ मेले में कल्पवास के दौरान अचानक हार्ट फेल्योर हो गया। जांच में टीबी न मिलने पर गंभीर माइट्रल स्टेनोसिस (बायां वाल्व सिकुड़ना) पाया गया। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वी.के. पांडेय ने आर्थिक सहायता देकर निःशुल्क बैलून माइट्रल वॉल्वोटॉमी कराई। अब युवक की हालत तेजी से सुधर रही है।
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