भारत-नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के महराजगंज के नौतनवा तहसील क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया ने नेपाली मूल की बहुओं के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। दशकों पहले नेपाल से विवाह कर भारत में बस चुकीं इन महिलाओं से अब नागरिकता प्रमाणपत्र की मांग की जा रही है, जिससे सैकड़ों परिवारों में चिंता और असमंजस का माहौल है। रुपंदेही जिले की विंजना पासी, अनीता देवी, सोनी, फुलकुमारी और प्रमिला जैसी कई महिलाएं लगभग 20 वर्ष पूर्व नौतनवा के ग्राम बड़हरा में विवाह कर आई थीं। तब से उनका पूरा जीवन भारत में ही बीता है। उन्होंने यहां परिवार बसाया, बच्चे और पोते-पोतियां जन्मे और पले-बढ़े। ये महिलाएं वर्षों से मतदान करती आ रही हैं और आधार कार्ड तथा अन्य भारतीय दस्तावेजों के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं। हालांकि, एसआईआर के तहत मतदाता सूची के सत्यापन में अब उनसे नागरिकता प्रमाणपत्र मांगा जा रहा है। इसके अभाव में उनकी भारतीय पहचान पर सवाल उठ रहे हैं। परिवार के सदस्यों का कहना है कि जब मायका (नेपाल में पैतृक घर) ही अस्तित्व में नहीं रहा या संपर्क टूट गया है, तो प्रमाणपत्र कहां से लाया जाए। कई महिलाओं के माता-पिता का देहांत हो चुका है, पुराने दस्तावेज खो गए हैं या नेपाल जाना व्यावहारिक नहीं है। सहायक चकबंदी अधिकारी (एईआरओ) चकलाल यादव ने स्पष्ट किया कि बिना नागरिकता प्रमाणपत्र के किसी को भारतीय नागरिक मानना संभव नहीं है। एसआईआर नियमों के अनुसार, नेपाल से आई महिलाओं को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए संबंधित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि प्रमाणपत्र नहीं है, तो प्रक्रिया रुक सकती है और मताधिकार प्रभावित हो सकता है। यह समस्या केवल नौतनवा तक सीमित नहीं है। महराजगंज, बहराइच और अन्य सीमावर्ती जिलों में भी ऐसी सैकड़ों नेपाली बहुएं प्रभावित हैं। भारत-नेपाल के बीच ‘रोटी-बेटी’ का पुराना रिश्ता रहा है, जहां खुली सीमा के कारण शादियां आम हैं। लेकिन नए एसआईआर नियमों ने इन परिवारों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता के लिए है, लेकिन स्थानीय लोग इसे अपनी पहचान पर हमला मान रहे हैं। कई परिवार अब वकीलों और स्थानीय नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। कुछ जगहों पर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नागरिकता पूरी तरह सुरक्षित है और केवल जानकारी भरनी है, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रम बना हुआ है। यदि प्रमाणपत्र नहीं मिला तो मतदाता सूची से नाम कटने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक तनाव भी उत्पन्न हो सकता है।
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