इस बार बजट में खास तौर पर छोटे और मध्यम आकार के शहरों यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सबसे बड़ी घोषणा रियल स्टेट इंवेस्टमेंट ट्रस्ट के जरिए संपत्तियों की रीसाइक्लिंग को तेज करने की रही। इसके तहत डेवलपर्स और सरकारी संस्थाएं पुरानी या निष्क्रिय संपत्तियों को मॉनेटाइज कर सकेंगी। इससे जो धन मिलेगा, उसे नए प्रोजेक्ट्स में लगाया जा सकेगा। सरकार ने 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग बनाने की भी योजना घोषित की है। इसके जरिए दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी जैसे कॉरिडोर के आसपास लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग और टाउनशिप प्रोजेक्ट्स की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके अलावा, 12.2 लाख करोड़ के पूंजीगत खर्च और औद्योगिक क्षेत्रों में 20,000 करोड़ के कार्बन कैप्चर प्रोजेक्ट्स से रियल एस्टेट सेक्टर को न केवल आधुनिक बनाया जाएगा, बल्कि इसे टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट 2026 निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के साथ-साथ छोटे और मध्यम शहरों में रियल एस्टेट की संभावनाओं को मजबूत करेगा।
गौड़ ग्रुप के सीएमडी, मनोज गौड़
बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक मजबूती पर दिया गया जोर, पब्लिक खर्च को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ करना, पिछले कुछ सालों से रियल एस्टेट में जो तेजी है उसे आगे बढ़ाएगा। इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार खर्च से ऑफिस, रिटेल और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स को फायदा मिलेगा। इससे रोजगार के मौके बढ़ेंगे और घरों की मांग भी मजबूत होगी।
काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर, अमित मोदी
टियर-2 और टियर-3 शहरों में लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से कनेक्टिविटी बेहतर होगी, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार होगा और मेट्रो के बाहर नए रेजिडेंशियल मार्केट्स खुलेंगे। जैसे-जैसे ये शहर ग्रोथ कॉरिडोर में जुड़ेंगे, हम संगठित और योजनाबद्ध रियल एस्टेट विकास देखेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की शुरुआत इस इकोसिस्टम को और मजबूत करेगी, क्योंकि यह फंडिंग में भरोसा बढ़ाता है। सीआरसी ग्रुप के डायरेक्टर–मार्केटिंग एंड बिज़नेस मैनेजमेंट,सलिल कुमार
घर खरीदने की मांग बढ़ाने में इंफ्रास्ट्रक्चर सबसे बड़ा कारण है और बजट में इस पर दिया गया जोर मेट्रो शहरों और दूसरे इलाकों में प्रीमियम हाउसिंग का रुख बदल सकता है। 12.2 लाख करोड़ के सरकारी खर्च से सड़कों, मेट्रो और कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिससे शहरों के बाहर और नए इलाकों में घर लेना ज्यादा आकर्षक बनेगा। मेट्रो शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी वाले बाहरी इलाकों में बड़े और लग्ज़री प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ सकती है ग्रुप 108 के मैनेजिंग डायरेक्टर, संचित भूटानी
केंद्रीय बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर और पूंजी खर्च पर लगातार ध्यान देना कमर्शियल रियल एस्टेट के लिए एक सकारात्मक कदम है। इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड जैसी पहल फंडिंग में भरोसा बढ़ाएगी और बड़े ऑफिस प्रोजेक्ट्स को अधिक व्यवहार्य बनाएगी। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी बेहतर कनेक्टिविटी भी प्रमुख बिजनेस मार्केट्स में ग्रेड A ऑफिस स्पेसेस के विकास में मदद करेगी और लंबी अवधि की मांग के लिए मजबूत आधार तैयार करेगी।
दुश्यंत सिंह, डायरेक्टर, ओरायन वन 32
“केंद्रीय बजट 2026 रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक सकारात्मक दिशा दिखाता है। इसमें बुनियादी ढांचा आधारित विकास और शहरी कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर सरकार का स्पष्ट ध्यान नजर आता है। पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी और नीतिगत सहयोग से खासकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर हवाई अड्डा जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में आवास और निवेश की मांग बढ़ेगी।
निखिल हवेलिया, मैनेजिंग डायरेक्टर, हवेलिया ग्रुप, एवं सचिव, क्रेडाई वेस्टर्न यूपी व एनसीआर
“इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड बैंकों के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है। इस घोषणा का संबंधित क्षेत्रों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, साथ ही जोखिम न्यूनीकरण और लिक्विडिटी संबंधी समस्याओं का भी समाधान होगा। मध्यम आकार के डेवलपर्स को बड़े पैमाने की परियोजनाओं का अवसर मिलेगा जो वास्तव में पुरानी अटकी हुई और रुकी हुई संपत्तियों की जरूरतों को पूरा करेंगी”।
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