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कागजों में दौड़ीं यूपी PWD की कंडम गाड़ियां:कबाड़ पहिए, टूटी स्टेयरिंग; फिर भी डीजल के नाम पर लाखों की लूट

यूपी PWD की 43 साल पुरानी जीप… URE-3740, जो लखनऊ में PWD के वर्कशॉप में खड़ी है। जीप के पहियों को जंग लग गया। सीटें उखड़ चुकी हैं। गियर बॉक्स, स्टेयरिंग और डैश बोर्ड टूट चुके हैं। इसके भीतर टूटी डस्टबिन, पोस्टर, टायर पड़े हैं। यह जीप कई साल से एक जगह खड़ी है। विभाग ने इसे कंडम घोषित कर दिया है। इसके बावजूद अफसरों की कलाकारी देखिए… इस वाहन को वे कागजों पर दौड़ा रहे हैं। वह भी 100-200 नहीं, हर महीने 5000 किमी से ज्यादा। जिससे इसकी आड़ में हर महीने 50 हजार रुपए डीजल खर्च दिखा सकें। PWD में ये केवल एक वाहन नहीं, बल्कि कई हैं। जिनके नाम पर हर महीने 50 हजार रुपए से ज्यादा का डीजल खर्च बता रहे। PWD में कंडम वाहनों के नाम पर डीजल खर्च का खेल क्या है? इसमें कौन अफसर लिप्त हैं? इन सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने इन्वेस्टिगेशन किया। पढ़िए, पूरा खुलासा… इस खेल को समझने और उजागर करने के लिए हमने 2 तरह की केस स्टडी की। पहली- वे वाहन, जो सालों से कबाड़ में पड़े हैं और उन्हें कंडम घोषित कर दिया है। फिर भी उन्हें कागजों पर चलाया जा रहा। दूसरी- वे वाहन, जो सालों से कबाड़ में पड़े हैं, लेकिन उन्हें कंडम घोषित नहीं किया है। इसका फायदा उठाकर उन्हें कागजों पर चलाया जा रहा। केस स्टडी- 1
हमारी टीम ने जीप URE-3740 के बारे में जानकारी जुटाई। इसमें पता चला कि ये PWD के वर्कशॉप में 2 साल से खड़ी है। हमने पार्किंग में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों से जान-पहचान बढ़ाई। इसके बाद एक दिन कैमरा लेकर पार्किंग में घुसे और जीप के फोटो-वीडियो बनाए। इनसे साफ हो गया कि ये जीप भंगार (कबाड़) है। क्या ये वाहन कंडम घोषित है?
इसके जवाब में हमें एक लेटर मिला। ये लेटर चीफ इंजीनियर यूके सिंह ने 26 अगस्त, 2025 को जारी किया था। इसमें साफ लिखा है कि जीप URE-3740 को कंडम घोषित किया जाता है। इसकी पुष्टि के लिए हमने चीफ इंजीनियर यूके सिंह से बात की। उन्होंने बताया- ये मेरा ही ऑर्डर है। मेरे आदेश के बाद जीप चलने की सूचना मिली थी। हमने जांच कमेटी बनाई है। जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। जांच की जिम्मेदारी सीनियर इंजीनियर (SE) आरएम श्रीवास्तव को सौंपी है। ऐसे पकड़ में आया कागजों में वाहन दौड़ाने का खेल
हमने वह बिल हासिल किया, जिसमें जीप में डीजल डलवाना दिखाया है। ये बिल नवंबर, 2025 का है। इसमें अलग-अलग 16 दिन में 540 लीटर डीजल डलवाना बताया है। बिल 49 हजार 816 रुपए का है। बिल में साफ लिखा है कि जीप URE-3740 में डीजल डलवाया गया है। किस अफसर की जेब में गया डीजल का पैसा…?
इस सवाल के जवाब के लिए हमने पता किया कि इस गाड़ी के संचालन की व्यवस्था कौन देख रहे हैं? हमें पता चला कि ये जिम्मेदारी जूनियर इंजीनियर टेक्निकल (JET) अनिल वर्मा के पास है। हमने उन्हें कॉल किया। वर्मा ने कहा- गाड़ी वर्कशाप में 1 जनवरी, 2026 से खड़ी कराई है। जीप दिसंबर, 2025 तक चलाई है। वर्मा के मुताबिक, सुजीत और लड‌्डू नाम के ड्राइवरों ने इसे चलाया है। हम इस बात की सच्चाई पता करने निकल गए। हमने लड्‌डू (अभिषेक भारद्वाज) को कॉल किया। उसने कहा- मैं चौकीदार हूं, गाड़ी क्यों चलाएंगे? उसने इसके अलावा और कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। हमने ड्राइवर सुजीत यादव से बात की। उसने बताया- जीप URE-3740 के बारे में नहीं जानता। JET अनिल वर्मा मेरा नाम क्यों ले रहे हैं? मैं उनके खिलाफ FIR कराऊंगा। आरटीओ बोले, नोटिस भेजेंगे
लखनऊ के आरटीओ संजय तिवारी से हमने इस जीप के बारे में बताया। उन्होंने कहा- ये जीप सालों तक बिना रिन्यूवल कैसे चलती रही, यह बड़ा सवाल है। अगर ऐसा हुआ है तो नोटिस भेजकर जवाब मांगेंगे और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखेंगे। क्या यह जीप वर्कशॉप से बाहर गई? इसके जवाब के लिए हमने यहां तैनात कर्मचारियों से बात की।
JET अनिल वर्मा ने कहा था कि जीप URE-3740 दिसंबर, 2025 तक चली है। उनकी इस बात में कितनी सच्चाई है? यह जानने के लिए हमने कर्मचारी डब्बू से बात की। उसने बताया- 2-3 साल से जीप खड़ी है, बाकी जानकारी आप JE से लीजिए। डब्बू के साथ खड़े सरकारी ड्राइवर मंजर ने भी यही बात दोहराई। चौकीदार कुलवंत ने कहा- वह 2-3 साल से जीप को ऐसा ही देख रहा है, ये कहीं बाहर नहीं गई। जीप URE-3740 पिछले 2-3 साल से एक ही जगह खड़ी है। ये चलने की हालत में नहीं है। इसे दिसंबर तक चलाने की अफसर की बात झूठ है। चीफ इंजीनियर ने इसे 26 अगस्त, 2025 को लेटर जारी कर कंडम घोषित कर उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद नवंबर, 2025 में जीप में 540 लीटर डीजल डलवाना दिखाकर अफसरों ने अपनी जेब गर्म कर ली। जीप URE-3740 के संचालन के लिए जिम्मेदार JET अनिल वर्मा ने हमसे झूठ बोला। उन्होंने जिन 2 ड्राइवरों का नाम लिया, उन्होंने जीप चलाने से साफ इनकार किया है। केस स्टडी-2 अब हमने दूसरा केस ऐसा खोजा जिसमें वाहन पुराना है, भंगार हालत में है। महीनों से कबाड़ में पड़ा है, लेकिन इसे अब तक कंडम घोषित नहीं किया है। जिससे इसके नाम पर डीजल खर्च बताकर पैसा हड़पा जा सके। इस कार के नाम कितने रुपए के बिल लगाए?
हमारे हाथ एक फाइल लगी। इसमें इस एंबेसडर के नाम पर नवंबर 2025 में 60 हजार 767 रुपए का डीजल डलवाना बताया। इसका भुगतान अधिशासी अभियंता रंजीता प्रसाद के हस्ताक्षर से किया गया। JET अनिल वर्मा ने कहा- यह गाड़ी दिसंबर, 2025 से पार्किंग में खड़ी है। वाहन का उपयोग एक्सईएन फिरदौस रहमानी ने अक्टूबर, 2025 तक किया था। गाड़ी के ड्राइवर सौरभ यादव हैं। हमने वर्मा की दोनों बातों की हकीकत जानने के लिए रहमानी और उनके ड्राइवर सौरभ से बात की।
हमने एक्सईएन फिरदौस रहमानी से बात की। उन्होंने कहा- 9 महीने से एंबेसडर का उपयोग नहीं किया। ड्राइवर सौरभ यादव ने बताया- 5 महीने से उसने ये गाड़ी नहीं चलाई।
हम आलमबाग के कोहली पंप पर पहुंचे। पंप मैनेजर अभिषेक मिश्रा ने बताया- PWD के JE के हस्ताक्षर से पर्ची आई तो डीजल डाल दिया। वाहन नंबर नहीं देखा। बाकी जानकारी के लिए आप पंप मालिक से बात कीजिए। विभागाध्यक्ष बोले- दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे ———————— ये खबर भी पढ़ें… यूपी-नेपाल बॉर्डर पर स्कूलों के नाम पर अवैध मदरसे, फिर खुल गए 500 से ज्यादा मदरसे; स्टिंग में खुलासा- विदेशी फंडिंग मिल रही मदरसा चला रहे… मान्यता नहीं है। प्राइवेट स्कूल की मान्यता लेंगे, ताकि साथ में दीनी तालीम (कुरान की पढ़ाई) भी दे सकें। यहां के कई लोग सऊदी में हैं… वे अपने घर पर पैसा भेजते हैं। फिर उनके परिवार वाले यहां जकात (चंदा) दे जाते हैं…। यह कहना है यूपी-नेपाल बॉर्डर पर अवैध मदरसा चलाने वालों का। पढ़ें पूरी खबर


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