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श्री राम कथा बनी जीवन मूल्यों की पाठशाला:पांचवें दिन ज्ञान-भक्ति से जुड़ा सामाजिक संदेश दिया गया

बरेली के मॉडल टाउन स्थित श्री हरि मंदिर में आयोजित श्री राम कथा का पांचवां दिन जीवन मूल्यों की प्रेरक पाठशाला बन गया। स्वामी डॉ. उमाकांतानंद सरस्वती महाराज के सान्निध्य में कथा स्थल पर ज्ञान, भक्ति और सामाजिक चेतना का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। महाराज जी ने नारद मुनि के चरित्र और तारकासुर संहार की कथा के माध्यम से संदेश दिया। उन्होंने बताया कि अहंकार, अधर्म और अधैर्य मानव जीवन के सबसे बड़े शत्रु हैं। स्वामी जी ने आज के भौतिक युग में निष्काम भक्ति और वैराग्य को मानसिक शांति का मार्ग बताया। कैलाश पर्वत पर भगवान कार्तिकेय और श्री गणेश की उत्पत्ति का प्रसंग सुनाते हुए स्वामी जी ने परिवार, संस्कार और कर्तव्यबोध को भारतीय संस्कृति की आत्मा बताया। उन्होंने तारकासुर वध की कथा को बुराई, अन्याय और अज्ञान के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक कहा, जो वर्तमान समाज में भी प्रासंगिक है। मनु महाराज के वृद्धावस्था में वनगमन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन के प्रत्येक चरण का अपना धर्म होता है और समय आने पर त्याग ही सच्चा ज्ञान है। यह कथा डिवाइन श्री राम इंटरनेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट, हरिद्वार द्वारा आयोजित की जा रही है। इसका आयोजन 28 जनवरी से 3 फरवरी तक प्रतिदिन हो रहा है। पांचवें दिन के यजमान प्रदीप सिंह चौहान रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में पूजा सेवा संस्थान, रोटरी क्लब ऑफ बरेली नॉर्थ, आर्ट एरेना और श्री हरि मंदिर प्रबंध समिति का विशेष योगदान रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, समाजसेवियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमामय बनाया।


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