हरदोई में 25 साल पुराने बाइक चोरी के एक मामले में पुलिस एक भी गवाह पेश नहीं कर पाई। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) रिचा वर्मा ने आरोपी बनारसी को न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई और 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह मामला 17 अक्टूबर 2001 को शहर कोतवाली में तत्कालीन कोतवाल ने मुकदमा दर्ज कराया था। बताया कि मझरेता पुलिया पर संदिग्ध व्यक्तियों की जांच के दौरान एक बाइक पर दो लोग आते दिखे। पूछताछ में उन्होंने अपनी पहचान सीतापुर जनपद के शहर कोतवाली क्षेत्र के बांसमंडी निवासी राजू उर्फ रिजवान और बनारसी के रूप में बताई। पुलिस ने दावा किया कि वे जिस बाइक पर सवार थे, वह चोरी की थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी रिजवान उर्फ राजू की मौत हो गई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कोई भी गवाह पेश नहीं किया जा सका। शेष आरोपी बनारसी ने अपने अधिवक्ता के साथ न्यायालय में पेश होकर जुर्म कबूलने का प्रार्थना पत्र दाखिल किया। उसने अपनी गरीबी और मामले के 25 साल पुराने होने का हवाला देते हुए कहा कि वह मुकदमा नहीं लड़ना चाहता और भविष्य में कोई गलत काम न करने का भरोसा दिलाया। उसने कम से कम सजा देने की अपील की। पत्रावली का अवलोकन करने के बाद सीजेएम ने पाया कि आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है और अभियोजन पक्ष 25 साल में उसके खिलाफ एक भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया। इन तथ्यों के आधार पर सीजेएम ने अभियुक्त बनारसी को न्यायालय उठने तक की सजा और 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

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