प्रयागराज में सफाई मजदूर एकता मंच, संबद्ध ऐक्टू के बैनर तले बुधवार को नगर निगम परिसर में केंद्र सरकार द्वारा लागू चार नए श्रम कोडों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान सफाई कर्मचारियों ने काला दिवस मनाते हुए काली पट्टी बांधकर काम किया और अपना विरोध दर्ज कराया। मंच के अध्यक्ष कामरेड बलराम पटेल ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थितियां संहिता 2020 श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों से कर्मचारियों की छंटनी और कारखानों को बंद करना आसान हो जाएगा, जिससे रोजगार सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने विशेष रूप से औद्योगिक संबंध संहिता का उल्लेख करते हुए बताया कि अब 300 तक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। पहले यह सीमा 100 कर्मचारियों तक थी। इससे छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों की नौकरी पर खतरा बढ़ गया है। नेताओं ने यह भी कहा कि नए कानूनों में ‘हड़ताल’ की परिभाषा को व्यापक बनाते हुए नोटिस अवधि बढ़ा दी गई है। जिससे श्रमिकों की सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति कमजोर होगी। ऐक्टू प्रदेश कमेटी सदस्य कामरेड राधा ने बताया कि इन नियमों से श्रम कानूनों का केंद्रीकरण बढ़ेगा और निरीक्षण प्रणाली कमजोर पड़ सकती है, जिससे श्रमिकों के अधिकारों की निगरानी में कमी आएगी। ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों ने यह चिंता भी जताई कि सामाजिक सुरक्षा संहिता में गिग वर्कर्स और संविदा कर्मियों को शामिल करने के बावजूद सभी श्रमिकों के लिए व्यापक और अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं दी गई है। इस प्रदर्शन में मंच के सचिव संतोष कुमार, राघवेंद्र पटेल, निलाक्षी कुशवाहा, राजबहादुर कुशवाहा, विजय गुप्ता, बबलू मौर्य, राकेश, रमेश यादव, राजीव, रोशन, रमेश समेत कई कर्मचारी और भाकपा माले के जिला प्रभारी कॉमरेड सुनील मौर्य भी शामिल रहे। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक चारों श्रम कोड वापस नहीं लिए जाते, उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

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