मेरठ 3 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण की साक्षी बनने जा रही है, जब देशव्यापी यात्रा के तहत सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के लगभग 1000 वर्षों से संरक्षित पावन अंश शहर में पहुंचेंगे। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता और आध्यात्मिक चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इन पवित्र अंशों को जनवरी 2025 में परंपरा के अंतिम संरक्षक पंडित सीताराम शास्त्री ने बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर को समर्पित किया था। इसके बाद महाशिवरात्रि 2025 पर इनका सार्वजनिक अनावरण किया गया। यह पावन यात्रा देश के कई राज्यों—पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल—से होती हुई उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर चुकी है। झांसी, कानपुर, आगरा, मथुरा, वृंदावन, गाजियाबाद, मुरादाबाद, प्रयागराज और वाराणसी से गुजरते हुए यह यात्रा अब मेरठ पहुंचेगी।
इतिहास के अनुसार 1026 ईस्वी में आक्रांता महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को ध्वस्त कर दिया था, लेकिन आस्था की ज्योति कभी मंद नहीं पड़ी। मंदिर के कुछ पवित्र अंशों को अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने गुप्त रूप से सुरक्षित रखा, जो पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित होते रहे। बताया जाता है कि 1924 में कांची के शंकराचार्य ने भविष्यवाणी की थी कि इन अंशों को एक शताब्दी तक सुरक्षित रखा जाएगा और उचित समय आने पर दक्षिण भारत के एक ‘शंकर’ नाम वाले संत को सौंपा जाएगा। इसी परंपरा के तहत 2025 में यह जिम्मेदारी गुरुदेव श्री श्री रविशंकर को सौंपी गई। मेरठ को मिलेगी नई आध्यात्मिक पहचान
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अंशों का आगमन मेरठ के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करेगा। यह आयोजन श्रद्धा, धैर्य और सांस्कृतिक चेतना की विजय का प्रतीक माना जा रहा है।

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