ललितपुर जिले के गिरार थाना क्षेत्र में वर्ष 2017 में एक महिला की आग से जलकर हुई संदिग्ध मौत के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायालय ने मृतका के पति और उसके परिजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना करने के निर्देश पुलिस को दिए हैं। यह घटना 14 जनवरी 2017 को हुई थी। उस समय गिरार थाना क्षेत्र निवासी सुखराम ने पुलिस को तहरीर दी थी। उसने आरोप लगाया था कि उसकी चचेरी बहन रचना और गांव की चाची कुसुम द्वारा गाली-गलौज किए जाने से आहत होकर उसकी पत्नी प्रार्थना ने खुद पर डीजल डालकर आग लगा ली थी, जिससे उसकी मौत हो गई। दोनों महिलाओं की संलिप्तता सिद्ध नहीं हो सकी सुखराम की तहरीर के आधार पर पुलिस ने दोनों महिलाओं के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 504, 506 और 306 के तहत मामला दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया था। जिला एवं सत्र न्यायालय में इस प्रकरण का सत्र परीक्षण हुआ। सुनवाई के दौरान दोनों महिलाओं की संलिप्तता सिद्ध नहीं हो सकी। इसी बीच, वर्तमान जनपद न्यायाधीश अशोक कुमार सिंह ने फाइल का गहन अवलोकन किया, जिसमें कई गंभीर खामियां सामने आईं। न्यायालय ने पाया कि विवेचना के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट का समुचित उल्लेख नहीं किया गया था। जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का परीक्षण किया गया, तो उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के अनुसार, मृतका के शरीर पर चोट के निशान थे, जो स्वयं आग लगाने की स्थिति में संभव नहीं होते। इसके अतिरिक्त, मृतका की जीभ बाहर निकली हुई थी, जो आमतौर पर गला दबाने की स्थिति में होता है। साथ ही, उसके पैरों के तलवे भी जले हुए थे, जबकि खुद आग लगाने पर तलवे सुरक्षित रहते हैं। इन विसंगतियों के आधार पर न्यायालय ने फिर से विवेचना का आदेश दिया है।

Leave a Reply