BHU में शिक्षकों की लंबित मांगों को लेकर आज माहौल गर्म हो गया, जब बड़ी संख्या में शिक्षक केंद्रीय कार्यालय (सेंट्रल ऑफिस) पहुंचकर उच्च अधिकारियों से सीधे संवाद करने लगे। शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी कई महत्वपूर्ण समस्याएं वर्षों से लंबित हैं, जिनका समाधान अब तक नहीं किया गया है। प्रमुख मांगें क्या हैं? • यूजीसी के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों के अनुरूप नोशनल इंक्रीमेंट लागू किया जाए • पूर्व सेवा की गणना सुनिश्चित की जाए • पीडीएफ से जुड़े मामलों का शीघ्र निपटारा हो • मेडिकल कॉलेज में डीएसीपी के तहत प्रमोशन और कैरियर विकास में आ रही बाधाएं तुरंत हटाई जाएं • शिक्षकों का कहना है कि इन मुद्दों के लंबित रहने से उनके कैरियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रशासन पर गंभीर आरोप शिक्षकों ने आरोप लगाया कि डिप्टी रजिस्ट्रार वेलु ए. द्वारा विश्वविद्यालय के नियमों की गलत व्याख्या की जा रही है। इससे न केवल निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय में असंतोष का माहौल बन गया है। शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यकारी परिषद द्वारा गठित ग्रेवांस कमेटी की सिफारिशों की गोपनीयता भंग की जा रही है। नियमानुसार रिपोर्ट को हायर ग्रेवांस कमेटी के पास समीक्षा के लिए भेजा जाना चाहिए था, लेकिन मेंबर सेक्रेटरी द्वारा इसे सीधे कुलसचिव को सौंप दिया गया, जो नियमों के विरुद्ध बताया जा रहा है। इसके साथ ही रिपोर्ट को जानबूझकर विलंबित करने का भी आरोप लगाया गया है। 10 वर्षों से लंबित मुद्दे शिक्षकों का कहना है कि पिछले चार वर्षों से नोशनल इंक्रीमेंट और डीएसीपी के तहत प्रमोशन को रोका जा रहा है। इससे न केवल उनकी पेशेवर प्रगति बाधित हुई है, बल्कि आर्थिक और मानसिक दबाव भी बढ़ा है। कई शिक्षकों ने इसे “अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण” करार दिया। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे मामला प्रधानमंत्री कार्यालय तक ले जाएंगे। साथ ही लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन भी शुरू किया जाएगा। बहुत से अध्यापक ऐसे हैं जिनका प्रमोशन 20 सालों से नहीं हुआ है ऐसा उन्होंने दावा किया है।

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