पीलीभीत जिला पंचायत में सरकारी धन के दुरुपयोग और नियमों का उल्लंघन कर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) धर्मेंद्र कुमार पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है। अपर मुख्य अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर शहर से सटी निजी कॉलोनियों में सीसी सड़क और नाला निर्माण के लिए सरकारी खजाने से लाखों रुपये आवंटित किए। यह आवंटन निजी क्षेत्रों में सरकारी बजट के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला है। पंचम राज्य वित्त आयोग के बजट से एक निजी कॉलोनी में लगभग 10.30 लाख रुपये की लागत से 150 मीटर लंबी सड़क और दूसरी जगह 3.81 लाख रुपये की लागत से 55 मीटर सड़क के टेंडर जारी किए गए। इसके अतिरिक्त, 15वें वित्त आयोग (टाइड फंड) से भी करीब 6.56 लाख रुपये नाला निर्माण पर खर्च किए जा रहे हैं। सरकारी धन का दुरुपयोग किया आरोप है कि इससे पहले भी 15वें वित्त आयोग से 16.25 लाख रुपये का भुगतान निजी क्षेत्र में निर्माण कार्य कराकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा चुका है। यह दर्शाता है कि निजी क्षेत्रों में सरकारी धन के उपयोग की यह पहली घटना नहीं है। भ्रष्टाचार का यह मामला केवल धन के दुरुपयोग तक सीमित नहीं है। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि 25 नवंबर 2025 को संबंधित अभियंता मिठाई लाल के अवकाश पर होने के बावजूद, उनकी डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग करके 95 ई-निविदाओं की वित्तीय बिड खोल दी गई। इतना ही नहीं, उन ठेकेदारों की निविदाओं को भी मंजूरी दे दी गई जिन्होंने ’10 श्रमिकों के पंजीकरण’ की अनिवार्य शर्त का उल्लंघन किया था। यह प्रक्रिया निविदा नियमों की स्पष्ट अवहेलना है जिलाधिकारी के आदेश पर मुख्य विकास अधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट, वरिष्ठ कोषाधिकारी और अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी सहित चार जिला स्तरीय अधिकारियों की एक समिति गठित की गई थी। इस समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में अपर मुख्य अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को दोषी पाया है। जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद, उनके खिलाफ अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मुख्यमंत्री से कठोर कार्रवाई की मांग शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में मांग की है कि जांच रिपोर्ट में दोषी पाए जाने और शासकीय धनराशि का दुरुपयोग करने के आरोप में अपर मुख्य अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए। इस मामले ने जिला पंचायत के कामकाज और सरकारी धन के नियोजन पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

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