झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के सिविल सर्जन और कुछ दूसरे अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को खून चढ़ाने के बाद उनके एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने के गंभीर मामले के बाद की गई है।
क्या है पूरा मामला?
पहले चाईबासा के लोकल ब्लड बैंक पर एक सात साल के थैलेसीमिया मरीज के परिवार ने एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने का आरोप लगाया था। इसके अगले दिन, रांची से आई एक जांच टीम ने चार और बच्चों को एचआईवी पॉजिटिव पाया, जिससे संक्रमित बच्चों की कुल संख्या पांच हो गई। सात साल के बच्चे को ब्लड बैंक से अब तक करीब 25 यूनिट खून चढ़ाया जा चुका था।
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मुख्यमंत्री का सख्त फैसला
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर इस घटना पर कड़ा रुख दिखाते हुए कहा, ‘चाईबासा में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाए जाने की खबर मिलने के बाद, पश्चिमी सिंहभूम के सिविल सर्जन और संबंधित अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश दिया गया है। राज्य सरकार पीड़ित बच्चों के परिवारों को ₹2-2 लाख की आर्थिक मदद देगी और संक्रमित बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी।’
चाईबासा में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाने की सूचना पर पश्चिमी सिंहभूम सिविल सर्जन समेत अन्य संबंधित पदाधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश दिया है।
पीड़ित बच्चों के परिवारों को 2-2 लाख रूपये की सहायता राशि राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी तथा संक्रमित…— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) October 26, 2025
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जांच में मिली गड़बड़ी
सात साल के बच्चे के परिवार के आरोपों के बाद, राज्य सरकार ने तुरंत डायरेक्टर डॉ. दिनेश कुमार की अगुआई में पांच डॉक्टरों की एक टीम बनाई। टीम ने सदर अस्पताल के ब्लड बैंक और बच्चों के पीआईयू वार्ड का जायजा लिया।
डॉ. दिनेश कुमार ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चला है कि थैलेसीमिया के एक मरीज को खराब खून चढ़ाया गया था। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान ब्लड बैंक में कुछ कमियां मिली हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए अधिकारियों को कहा गया है।
हालांकि, जिले के सिविल सर्जन डॉ. सुशांतो माझी ने पहले कहा था कि एचआईवी संक्रमण इस्तेमाल की गई सिरिंज के संपर्क में आने जैसे दूसरे कारणों से भी हो सकता है।
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