बलिया कलेक्ट्रेट परिसर के दुकानदारों ने दुकानों के किराए में भारी वृद्धि और नई नीलामी नीति के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट आशाराम वर्मा को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिलाधिकारी को संबोधित था। दुकानदारों ने बताया कि कलेक्ट्रेट परिसर में उनकी दुकानें लगभग 30-35 वर्षों से स्थापित हैं। ये दुकानें उनके परिवारों के जीविकोपार्जन और भरण-पोषण का मुख्य साधन हैं। नजारत विभाग ने 30 मार्च को गंगा बहुद्देश्यीय सभागार में सभी दुकानदारों को नए नियमों से अवगत कराया। इन नियमों के अनुसार, दुकानों का आवंटन नजारत द्वारा तय नए शुल्क पर खुली नीलामी के माध्यम से केवल एक वर्ष के लिए किया जाएगा।
दुकानदारों के अनुसार, परिसर में स्थित लगभग 160 दुकानों से लगभग 2000 व्यक्तियों का जीवन-यापन होता है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि नए नियम लागू होने से सभी दुकानदार बेरोजगार हो जाएंगे, जिससे उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घरेलू खर्चों पर गंभीर संकट आ जाएगा। पहले दुकानों का नवीनीकरण कुछ प्रतिशत शुल्क वृद्धि के साथ कर दिया जाता था। दुकानदारों ने अनुरोध किया कि पुराने नियमों के अनुसार ही कुछ प्रतिशत शुल्क वृद्धि के साथ दुकानों का नवीनीकरण किया जाए और नए नियमों को वापस लिया जाए। उनका कहना है कि इससे उनके परिवारों का भरण-पोषण जारी रह सकेगा और वे बेरोजगारी से बच सकेंगे।

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