बांदा मंडल कारागार में तैनात एक महिला सिपाही की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 30 वर्षीय भारती पाल की मौत जहरीला पदार्थ खाने से हुई, लेकिन यह आत्महत्या है या इसके पीछे कोई और कारण इसका जवाब फिलहाल जांच के दायरे में है। दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट में पढ़िए पूरी घटना का सिलसिलेवार घटना वाले दिन भारती पाल ने महिला बैरक में अपनी नाइट ड्यूटी पूरी की थी। ड्यूटी खत्म होने के बाद वह रोज की तरह जेल परिसर स्थित अपने सरकारी क्वार्टर में चली गईं। कुछ समय बाद जब अन्य महिला बंदी रक्षक वहां पहुंचे, तो भारती गंभीर हालत में मिलीं। उनकी स्थिति देखकर तुरंत हड़कंप मच गया और मामले की सूचना जेल प्रशासन को दी गई। अस्पताल से मेडिकल कॉलेज तक, इलाज के दौरान मौत सूचना मिलते ही जेल अधीक्षक आलोक कुमार हरकत में आए और तत्काल भारती को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने हालत नाजुक देखते हुए उन्हें रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अस्पताल से भेजे गए मेमो के आधार पर कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। खुले दरवाजे और अनसुलझे सवाल, बढ़ी रहस्य की परतें जेल कर्मियों के अनुसार, जब भारती को क्वार्टर में देखा गया, तो दरवाजे खुले हुए थे। यह तथ्य घटना को और संदिग्ध बना रहा है। क्या उन्होंने खुद जहर खाया या कोई और वजह रही। इस पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस हर एंगल आत्महत्या, दबाव या किसी अन्य कारण की जांच कर रही है। परिवार ने जताया शक, सहकर्मी बोले- कभी नहीं दिखी परेशान’ मृतका के पिता ने बताया कि भारती पांच दिन पहले ही झांसी से बांदा लौटी थीं और उनका माइग्रेन का इलाज चल रहा था। उन्होंने साफ कहा कि उनकी बेटी ऐसा कदम नहीं उठा सकती।
वहीं सहकर्मियों का कहना है कि भारती मिलनसार स्वभाव की थीं और उन्होंने कभी किसी परेशानी का जिक्र नहीं किया। हालांकि, कुछ लोग प्रेम प्रसंग की आशंका भी जता रहे हैं, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

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