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6.37 करोड़ के एलआईसी घोटाले का आरोपी गिरफ्तार:11 साल पुराने केस में फरार चल रहा था; लखनऊ मेट्रो स्टेशन से दबोचा गया घोषित अपराधी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एलआईसी में हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले के एक बड़े आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। करीब 11 साल पुराने इस मामले में फरार चल रहे घोषित अपराधी समीर जोशी को लखनऊ के एक मेट्रो स्टेशन से दबोचा गया। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

मेट्रो स्टेशन से दबोचा गया, कोर्ट ने भेजा जेल
CBI को मिली गुप्त सूचना के आधार पर 31 मार्च 2026 को समीर जोशी को लखनऊ के एक मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के बाद उसे उसी दिन संबंधित ट्रायल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
CBI अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

2012 में दर्ज हुआ था मामला, एलआईसी फंड में हेराफेरी का आरोप
CBI ने यह मामला 13 अगस्त 2012 को एलआईसी, लखनऊ की शिकायत पर दर्ज किया था। आरोप था कि फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच जंकिपुरम स्थित एलआईसी कार्यालय में फर्जी चेक तैयार कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने गैर-मौजूद पॉलिसी धारकों के नाम पर फर्जी क्लेम दिखाकर एलआईसी फंड से 6.37 करोड़ रुपये निकाल लिए। इस घोटाले को छिपाने के लिए खातों में हेरफेर और फर्जी एंट्री भी की गईं।
12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, समीर जोशी भी शामिल
CBI ने जांच पूरी होने के बाद 21 अगस्त 2014 को 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें समीर जोशी का नाम भी शामिल था।
जांच के दौरान सामने आया कि समीर जोशी ने एलआईसी के तत्कालीन हायर ग्रेड असिस्टेंट पंकज सक्सेना के साथ मिलकर साजिश रची। दोनों ने मिलकर समीर जोशी, उनकी पत्नी अंजू जोशी और कर्मचारी जितेंद्र कुमार के नाम पर फर्जी चेक तैयार किए।
62 लाख रुपये निकाले, आपस में बांटे
CBI के अनुसार, फर्जी चेक के जरिए करीब 62 लाख रुपये की राशि निकाली गई, जिसे आरोपियों ने आपस में बांट लिया।
समीर जोशी को जांच के दौरान गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उसे जमानत मिल गई। इसके बाद वह फरार हो गया और लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचता रहा।
जमानत पर छूटने के बाद फरार, 2025 में घोषित हुआ अपराधी
जमानत मिलने के बाद समीर जोशी अदालत में पेश नहीं हुआ और फरार हो गया। लगातार गैरहाजिर रहने पर 24 दिसंबर 2025 को उसे अदालत ने घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया।
CBI उसकी तलाश में लगातार जुटी थी और उसके ठिकानों की जानकारी जुटा रही थी।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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