मेरठ में शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के अवैध निर्माणों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। कोर्ट की कार्यसूची में यह मामला 63वें नंबर पर सूचीबद्ध है, जिससे व्यापारियों में भारी चिंता और बेचैनी का माहौल बना हुआ है। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय भवनों में नियमों के विरुद्ध संचालित शोरूम और दुकानों के ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। जैसे-जैसे यह समयसीमा समाप्ति की ओर बढ़ रही है, प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
इस कार्रवाई की जद में कुल 1468 निर्माण बताए जा रहे हैं, जिससे पूरे बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। मंगलवार को भी बाजार में अफरा-तफरी का माहौल रहा। कई दुकानदारों ने कानूनी कार्रवाई और संभावित तोड़फोड़ के डर से अपनी दुकानों को ईंट-दीवारों और दरवाजों से बंद करना शुरू कर दिया है। अब तक 150 से अधिक दुकानें बंद की जा चुकी हैं। व्यापारी अपने महंगे सामान और फर्नीचर को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर रहे हैं। वहीं, नई शमन नीति के तहत बास्तुविद नगर नियोजक द्वारा 80 व्यापारियों को नोटिस जारी किए गए थे। व्यापारियों का दावा है कि अब तक 35 लोग अपनी दुकानों को नियमित कराने के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि शमन शुल्क के रूप में जमा कर चुके हैं।
कई व्यापारी फ्रंट सेटबैक छोड़ने और भू-उपयोग को आवासीय से व्यावसायिक में बदलने की प्रक्रिया में जुटे हैं। हालांकि, आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने इस शमन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विरुद्ध बताया है और मुख्यमंत्री व सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई है। उधर, आवास एवं विकास परिषद ने पूरे क्षेत्र का नए सिरे से सर्वे पूरा कर लिया है। ड्रोन कैमरों के जरिए अवैध निर्माणों और अतिक्रमण की पहचान की गई है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंप दी गई है। इधर, व्यापारियों ने बैठक कर अपनी रणनीति तैयार की है और प्रशासन से राहत की अपील की है। उनका कहना है कि यह केवल दुकानों का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के रोजगार का सवाल है।
अब सबकी नजरें आज होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि मेरठ का यह प्रमुख व्यावसायिक केंद्र अपने मौजूदा स्वरूप में बना रहेगा या फिर यहां बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। अब तक ये एक्शन हुआ सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ की शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट में आवास विकास परिषद ने अवैध रूप से बने 661/6 कॉम्प्लेक्स और 100 से अधिक दुकानों पर बुलडोजर चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है। यह 35 साल पुराना विवादित निर्माण था, जिसे लेकर कोर्ट के सख्त आदेशों के बाद सुरक्षाबलों की मौजूदगी में अक्टूबर 2025 में कार्रवाई शुरू की गई। सुप्रीम कोर्ट ने आवासीय भूखंडों पर अवैध रूप से बनी व्यावसायिक दुकानों (शोरूम) को ध्वस्त करने का आदेश दिया था, जो 35 साल से विवादित था। अक्टूबर 2025 में आवास विकास परिषद ने पुलिस और भारी सुरक्षा बल के साथ कॉम्प्लेक्स के 22 दुकानों को ढहा दिया और अन्य अवैध निर्माण चिन्हित किए। बीती 27 जनवरी को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 सप्ताह के भीतर अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। कोर्ट की इस डेडलाइन के पूरा होने के करीब आने के साथ ही प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इस आदेश की जद में कुल 1468 निर्माण आ रहे हैं। ये वे भवन हैं जो मूल रूप से आवासीय श्रेणी के हैं लेकिन वर्तमान में यहां बड़े-बड़े शोरूम, कॉम्प्लेक्स और दुकानें संचालित हो रही हैं।
खुद दुकानें बंद करने को मजबूर व्यापारी
प्रशासनिक और न्यायिक दबाव के बीच मंगलवार को भी बाजार में अफरा-तफरी देखी गई। कई दुकानदारों ने कानूनी कार्रवाई और तोड़फोड़ के डर से अपनी दुकानों को ईंट-दीवारों और खिड़की-दरवाजों से बंद करना शुरू कर दिया है। अब तक 150 से ज्यादा दुकानें बंद की जा चुकी हैं। व्यापारी अपने कीमती सामान और फर्नीचर को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर रहे हैं। मामले को सुलझाने के लिए नई शमन नीति के तहत वास्तुविद नगर नियोजक की ओर से 80 व्यापारियों को नोटिस जारी किए गए थे। व्यापारियों के अनुसार अब तक 35 व्यापारियों ने अपनी दुकानों को नियमित कराने के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम धनराशि शमन शुल्क के तौर पर जमा कराई है। कई व्यापारी फ्रंट सेटबैक छोड़ने और आवासीय से व्यावसायिक में भू-उपयोग परिवर्तनकी प्रक्रिया में जुटे हैं।हालांकि आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने इस शमन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं और मुख्यमंत्री व सुप्रीम कोर्ट में आपत्ति पत्र दाखिल किया है। उनका तर्क है कि आवास विकास परिषद की कॉलोनियों में इस तरह का नियमितीकरण नियमों के विरुद्ध है।
ड्रोन से निगरानी और सर्वे
आवास एवं विकास परिषद ने पूरे क्षेत्र का नए सिरे से सर्वे पूरा कर लिया है। प्रशासन ने न केवल वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई है बल्कि ड्रोन कैमरों के जरिए भी अवैध निर्माणों और अतिक्रमण की पहचान की गई है। जिला प्रशासन को इसकी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जा चुकी है।

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