सिविल लाइन क्षेत्र में रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन के पास रविवार रात कड़ाके की ठंड के बावजूद कई पुरुष और महिलाएं खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर दिखे। यह स्थिति प्रशासन के उन दावों पर सवाल उठाती है, जिनमें कहा गया था कि कोई भी व्यक्ति खुले में नहीं सोएगा। रविवार देर रात भास्कर संवाददाता ने मौके पर पड़ताल की, जहां दर्जन भर से अधिक लोग फुटपाथ पर सोते हुए पाए गए। ठंड से बचाव के लिए कुछ लोगों ने पतली चादरें ओढ़ रखी थीं, जबकि कुछ लिहाफ और कपड़ों के सहारे रात गुजार रहे थे। रोडवेज परिसर में प्रशासन द्वारा बनाए गए रैन बसेरे की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया गया है कि यह रैन बसेरा पूरी तरह पुरुषों से भरा हुआ है। महिलाओं ने बताया कि वहां उनके लिए सुरक्षित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण वे रैन बसेरे में जाने से बच रही हैं और खुले में सोने को विवश हैं। जिलाधिकारी ने नगर पालिका और राजस्व विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसी भी व्यक्ति को खुले आसमान के नीचे न सोने दिया जाए और सभी को रैन बसेरों में ठहराया जाए। हालांकि, जमीनी स्तर पर इन निर्देशों का पालन होता नहीं दिख रहा है। रविवार रात साढ़े दस बजे से साढ़े ग्यारह बजे के बीच की गई पड़ताल में पाया गया कि नगर पालिका की कोई टीम या कोई अन्य जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। लोग ठंड में ठिठुरते रहे, जबकि प्रशासनिक तंत्र की ओर से कोई सहायता नहीं मिली।
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