शाहजहांपुर में सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों (SPES) ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया और एक ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने नियोक्ताओं पर अवैध स्थानांतरण, काम रोकने और नौकरी से बर्खास्त करने का आरोप लगाया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर ‘काला कानून’ बनाने का आरोप लगाते हुए ‘काला दिवस’ भी मनाया। कर्मचारियों का कहना है कि नियोक्ता फर्जी मुद्दे बनाकर उन्हें वेतन और यात्रा खर्च का भुगतान करने से इनकार कर रहे हैं। संगठन के सचिव सीएल तिवारी ने बताया कि उनकी मुख्य मांगों में चार श्रम संहिताओं को निरस्त करना और बिक्री संवर्धन कर्मचारी (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1976 सहित मौजूदा श्रम कानूनों को जारी रखना शामिल है। उन्होंने सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों की निश्चित अवधि के रोजगार (Fixed Term Employment) पर नियुक्ति की अनुमति न देने की भी मांग की। तिवारी ने नियोक्ताओं द्वारा सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों की छंटनी या स्थानांतरण न करने, नौकरी से न निकालने और सभी कर्मचारियों को समय पर पूरा वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने बिक्री संवर्धन कर्मचारी (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1976 और नियमों का पालन सुनिश्चित करने तथा FMRAI के साथ चर्चा के बाद वैधानिक कार्य नियम बनाने पर जोर दिया।
इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों ने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के माध्यम से निगरानी, ट्रैकिंग और गोपनीयता में घुसपैठ को रोकने की मांग की। उन्होंने ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण दैनिक भत्ता/यात्रा भत्ते में वृद्धि करने के लिए नियोक्ताओं को आदेश देने और श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं पर मुकदमा चलाकर उन्हें उचित सजा देने की भी अपील की। सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों ने अस्पतालों और संस्थानों में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (सेल्स प्रमोशन कर्मचारियों) के काम करने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले को वापस लेने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के काम को आपराधिक कृत्य न माना जाए और अपना काम करने पर उन्हें मुकदमों में फंसाकर जेल न भेजा जाए।

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