बलिया के रामगढ़ गंगापुर स्थित महर्षि भृगु वैदिक गुरुकुलम में इन दिनों भक्ति और अध्यात्म का संगम देखने को मिल रहा है। गंगा तट पर आयोजित श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के दौरान वैदिक परंपराओं का भव्य प्रदर्शन किया जा रहा है। इस आयोजन में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ रहा है। महायज्ञ के तहत मां गंगा की भव्य एवं दिव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसने काशी के घाटों की भव्यता की याद दिला दी। आरती के दौरान भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। यह दृश्य महर्षि भृगु की पावन धरा पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहा था। यज्ञ का 5 तस्वीरें देखिए… महायज्ञ के साथ ही आयोजित राम कथा के तीसरे दिन आचार्य उत्कर्ष ने प्रभु राम के आदर्श चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भगवान राम का जीवन हमें मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की सीख देता है। आचार्य के भजनों और कथा पर श्रद्धालु देर रात तक भक्ति सागर में लीन रहे। यज्ञ के तीसरे दिन एक प्राचीन पद्धति ‘अरणी मंथन’ का भी प्रदर्शन किया गया। लकड़ियों के घर्षण से अग्नि प्रकट कर अग्निस्थान में होम आहुतियां प्रदान की गईं। वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ और ‘स्वाहा’ की गूंज से पूरा वातावरण अत्यंत दिव्य हो उठा। आरती अर्चक अतुल ने इस अवसर पर आचार्य मोहित पाठक के संकल्पों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि आचार्य का लक्ष्य इस स्थान को ‘भृगु काशी’ के रूप में पूर्णतः विकसित करना है। भविष्य में भक्तों को बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए ही काशी जाना होगा, शेष सभी आध्यात्मिक अनुष्ठान और सुविधाएँ इसी भृगु क्षेत्र के गुरुकुलम में उपलब्ध होंगी।

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