यह एक बड़ी समस्या है क्योंकि चुनाव आयोग के निर्देशों पर कुछ लोग जानबूझकर पुराने वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा रहे हैं. 2002 की लिस्ट में शामिल कई बुजुर्गों के नाम पोर्टल में शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे उनकी वोटिंग प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. पुराने दस्तावेजों की खोज कठिन हो गई है और इससे संबंधित मुद्दा लोकसभा लीडर अभिषेक बनर्जी ने प्रमुखता से उठाया है. उनकी पहल पर चुनाव आयुक्त भी इस स्थिति को लेकर आश्चर्यचकित हैं.
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