संभल में माघ पूर्णिमा के अवसर पर कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लाखों भक्तों ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना की। इस दौरान पुलिस प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर अलर्ट रहा। शनिवार को सुबह 5 बजे से ही जनपद संभल की गुन्नौर तहसील के बबराला स्थित राजघाट गंगा, असदपुर गंगा घाट, सिसौना डांडा, अनूपशहर पुल स्थित विष्णु घाट और हरिबाबा बांध सहित विभिन्न घाटों पर श्रद्धालु पहुंचने लगे। ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुए इस गंगा स्नान में अब तक 5 लाख से अधिक श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। सुबह ठंड अधिक होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या कम थी, लेकिन 9 बजे के बाद भीड़ में तेजी आई। कई श्रद्धालुओं ने इस पूर्णिमा पर कल्पवास का संकल्प भी लिया। देखें 4 तस्वीरें… माघ पूर्णिमा का व्रत शुभव्रत नामक एक ब्राह्मण और देवीदास नामक युवक की कथा से जुड़ा है। यह कथा बताती है कि कैसे लालच और अज्ञानता के बावजूद, माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान और पूर्णिमा के व्रत से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई और उनके कष्ट दूर हुए। इस व्रत से संतान सुख और मनोकामना पूर्ति का वरदान भी मिलता है, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा और सत्यनारायण कथा का विशेष विधान है। गंगा घाट पर पूजा-अर्चना करा रहे पंडित हरिओम शर्मा ने माघ पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माघ महीने में सूर्य का अवतरण होता है, देवता पृथ्वी पर आते हैं और भगवान विष्णु ने भी इसी माह में अवतार लिया था। पंडित शर्मा के अनुसार, आज के दिन स्नान और दान करने से व्यक्ति को मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इसलिए इस महीने को सभी महीनों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है, और भगवान के अवतार के उपलक्ष्य में घरों में कथा एवं हवन भी आयोजित किए जाते हैं।
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