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कोविड मुआवजे को टेस्ट रिपोर्ट या मृत्यु प्रमाण पत्र जरूरी:साक्ष्य नहीं कि मृत्यु कोविड -19 के कारण, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोविड -19 से मृत्यु के आधार पर मुआवजा पाने के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि मृतक वास्तव में कोविड संक्रमित था। इसके लिए या तो कोविड पॉजिटिव टेस्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी या ऐसा मृत्यु प्रमाण पत्र, जिसमें मौत का कारण कोविड -19 दर्ज हो।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका खारिज की, जिसमें कोविड से कथित मौत पर मुआवजे की मांग की गई थी। अध्यापिका की मौत हुई थी मामले के अनुसार याची अजय कुमार की पत्नी सहायक अध्यापिका थी। वह अप्रैल 2021 में चुनाव ड्यूटी पर तैनात थीं। याचिकाकर्ता का दावा था कि इसी दौरान उन्हें कोविड संक्रमण हुआ और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। उन्होंने मुआवजे के लिए आवेदन किया, जिसे फिरोजाबाद के जिलाधिकारी ने खारिज कर दिया।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया और छाती की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उस समय कोविड का प्रकोप था, इसलिए उनकी पत्नी की मौत कोविड से ही हुई मानी जानी चाहिए। टेस्ट रिपोर्ट के बिना मुआवजा कैसे पति की तरफ से यह भी तर्क दिया कि पॉजिटिव सीटीपीआर या एंटीजन रिपोर्ट अनिवार्य नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि मुआवजा योजना के तहत तीन प्रमुख दस्तावेज जरूरी हैं कोविड संक्रमण का प्रमाण, पॉजिटिव टेस्ट रिपोर्ट और कोविड के कारण हुई मृत्यु का प्रमाण। हालांकि कोर्ट ने यह भी माना कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु संक्रमण के 30 दिनों के भीतर होती है और मृत्यु प्रमाण पत्र में कोविड को कारण बताया गया है तो कुछ मामलों में टेस्ट रिपोर्ट के बिना भी मुआवजा दिया जा सकता है। लेकिन इस मामले में अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता कोई ऐसा दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो सके कि उसकी पत्नी की मृत्यु कोविड -19 के कारण हुई। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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