केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि छोटे और मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर एआई-आधारित अर्थव्यवस्था तथा रेलवे के लिए डेटा केंद्रों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यवहार्य और व्यावहारिक समाधान प्रदान करते हैं।
रेल मंत्री ने कहा कि भारत में बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास (शांति) विधेयक के पारित होने से देश भविष्य की नयी अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो गया है।
वैष्णव ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, ‘‘जैसे-जैसे दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपना रही है, डेटा केंद्र एआई-आधारित अर्थव्यवस्था को शक्ति प्रदान करेंगे। इन डेटा केंद्रों को भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी, जो केवल परमाणु ऊर्जा से ही प्राप्त की जा सकती है।’’
मंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा ही एकमात्र ऐसा स्रोत है जो बिना किसी प्रदूषण के सतत आधार भार और भारी विद्युत धारा प्रदान कर सकती है।
वैष्णव ने कहा कि नए डिजाइन से कंटेनर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना संभव हो जाता है, जिसे 14 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जहाजों को बिजली देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 15-30 मेगावाट क्षमता वाले परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का उपयोग रेलवे परिचालन के लिए भी किया जा सकता है।
वैष्णव ने कहा, ‘‘रेलवे देश भर में 700 स्थानों पर ग्रिड से बिजली लेता है। छोटे और मॉड्यूलर रिएक्टरों को भी बिजली के एक स्थायी स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।’’
उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में कई अंतर्निहित सुरक्षा विशेषताएं हैं जो उनके बड़े पैमाने पर उपयोग को संभव बनाती हैं।
वैष्णव ने कहा, ‘‘शांति विधेयक इसलिए पारित किया गया ताकि परमाणु ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत बन सके।’’
निजी क्षेत्र की कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की अनुमति देने वाला शांति विधेयक पिछले महीने शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा द्वारा पारित किया गया था।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शांति अधिनियम को अपनी मंजूरी दे दी है।
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