अमेठी में नकली उर्वरक और कीटनाशक निर्माण के मामले ने अब प्रमोद आलोक इंटर कॉलेज की भूमिका को भी जांच के दायरे में ला दिया है। कांग्रेस नेता डॉ. देवमणि तिवारी के मंगलपुर स्थित कॉलेज परिसर में नकली खाद व रसायन फैक्टरी पकड़े जाने के बाद, जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) अमेठी ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस मामले में जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव की तहरीर पर दो आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। किसान मजदूर सेवा संस्थान के प्रदेश प्रभारी प्रेम शंकर द्विवेदी ने कॉलेज परिसर में अवैध गतिविधियों की शिकायत करते हुए जांच की मांग की थी। शिकायत के आधार पर, डीआईओएस डॉ. राजेश द्विवेदी ने जांच समिति गठित की है। इसमें सोनारीकला स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रत्नेश कुमार को अध्यक्ष, अमेठी स्थित राजकीय हाईस्कूल के प्रधानाचार्य अनुज मौर्य और राजकीय हाईस्कूल अफोइया के प्रधानाचार्य अनिल रागिया को सदस्य बनाया गया है। समिति को दो दिनों के भीतर स्थलीय निरीक्षण कर विद्यालय प्रबंधन और शिकायतकर्ता दोनों का पक्ष सुनकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। डीआईओएस ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विद्यालय के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि नकली उर्वरक, कीटनाशक और बीज की बिक्री रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इंस्पेक्टर रवि सिंह ने जानकारी दी कि मामले की विवेचना शुरू हो गई है और मुख्य आरोपी शिवम तिवारी की तलाश जारी है। इस बीच, कॉलेज संचालक और कांग्रेस नेता डॉ. देवमणि तिवारी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि जिस भवन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह मान्यता प्राप्त विद्यालय भवन नहीं है। उनका मान्यता प्राप्त विद्यालय भवन लगभग 100 मीटर दूर स्थित है और वर्ष 2015 से वहीं संचालित हो रहा है। डॉ. तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी शिवम तिवारी से उनका कोई व्यावसायिक संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि शिवम के भाई उनके कॉलेज में अध्यापक थे और शिवम ने एक माह के लिए एक कमरा किराए पर लिया था।
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