काशी में पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। दशाश्वमेध घाट समेत सभी प्रमुख गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। चंद्र पंचांग के अनुसार पौष माह की पूर्णिमा तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है। देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया और बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद लें रहे। पहले देखें तस्वीर…. स्नान से मिलती है मोक्ष धार्मिक मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मिक शांति मिलती है। इसी विश्वास के चलते सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालु घाटों पर पहुंच गए और मंत्रोच्चार के साथ स्नान किया। स्नान के पश्चात घाटों पर विशेष यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। दान में तिन देने का विधान गंगा स्नान के बाद दान-पुण्य की परंपरा भी निभाई गई। श्रद्धालुओं ने अन्न, वस्त्र, धन और तिल का दान किया, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। दशाश्वमेध घाट पर विशेष भंडारों का आयोजन किया गया, जहां साधु-संतों और जरूरतमंदों को भोजन कराया गया। इस दिन भगवान विष्णु और सूर्यदेव की पूजा का भी विशेष महत्व है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला। जलपुलिस और NDRF तैनात श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। गंगा घाटों पर पुलिस बल की तैनाती की गई, वहीं NDRF और जल पुलिस की टीमें गंगा में लगातार गश्त करती रहीं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रशासन की मुस्तैदी के चलते स्नान पर्व शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
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