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पीएमईजीपी योजना,बैंकों की उदासीनता से दम तोड़ती उद्यमिता की उम्मीदें:512 आवेदनों में सिर्फ 50 को ही मिली है स्वीकृति, 332 एप्लीकेशन अटकी

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना बैंकों की अनदेखी का शिकार हो रही है। नालंदा जिला उद्योग केंद्र से विभिन्न बैंकों को भेजे गए 512 आवेदनों में से अब तक मात्र 50 को ही स्वीकृति मिल पाई है, जबकि 85 से अधिक आवेदन खारिज कर दिए गए हैं। शेष 332 बैंकों की फाइलों में धूल फांक रहे हैं। लक्ष्य से कोसों दूर वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब कुछ ही माह शेष हैं, लेकिन जिले में पीएमईजीपी के तहत निर्धारित 76 लाभार्थियों को उद्योग स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता देने का लक्ष्य अभी भी दूर की कौड़ी नजर आ रहा है। बैंकों की गैर-जिम्मेदाराना रवैए के कारण उद्यमिता के सपने देख रहे युवा निराश होकर उद्योग विभाग और बैंकों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। कहां अटकी है गाड़ी योजना के नियमों के अनुसार, 10 लाख रुपए तक का ऋण बिना किसी मार्जिन मनी के देना अनिवार्य है। इससे अधिक की राशि के लिए कुल परियोजना लागत का मात्र 10 प्रतिशत मार्जिन मनी लिया जाना चाहिए। परंतु बैंक प्रतिनिधि इसी बिंदु पर पेच फंसाते हैं। नियमों और शर्तों का बहाना बनाकर आवेदकों को टालमटोल में उलझा दिया जाता है। कई मामलों में तो बैंक अधिकारी अपनी मर्जी से चुनिंदा आवेदकों को ही लाभ देते पाए गए हैं। क्या है योजना का प्रावधान पीएमईजीपी योजना के अंतर्गत शिक्षित युवाओं को विनिर्माण क्षेत्र में 50 लाख रुपए तक और सेवा अथवा व्यवसाय क्षेत्र में 20 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाती है। योजना की खास बात यह है कि सरकार परियोजना लागत का 15 से 35 प्रतिशत तक अनुदान भी उपलब्ध कराती है, जिससे उद्यमियों पर वित्तीय बोझ कम हो सके। बैंकवार आवेदनों का लेखा-जोखा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को सर्वाधिक 153 आवेदन भेजे गए, जबकि पंजाब नेशनल बैंक को 120 आवेदन प्रेषित किए गए। इसके अतिरिक्त दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक को 50, केनरा बैंक को 29, इंडियन बैंक को 24, यूनियन बैंक को 18, बैंक ऑफ इंडिया को 17, बैंक ऑफ बड़ौदा को 13 और शेष बैंकों को आवेदन आवंटित किए गए थे। विभाग का पक्ष* जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक सचिन कुमार ने स्वीकार किया कि बैंकों की ओर से आवेदनों के निष्पादन में अनावश्यक विलंब हो रहा है। हमने सभी आवेदनों की गहन जांच के उपरांत ही बैंकों को भेजा है। प्रतिनिधियों को बार-बार पत्र लिखकर शीघ्र निष्पादन का आग्रह किया जा रहा है, लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं है।


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