हाफिजपुर थाना क्षेत्र में बन रही नई जिला कारागार के निर्माण कार्य में चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेज तैयार कर इस घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने एसपी के आदेश पर एक महिला सहित 12 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। बरेली के प्रेमनगर स्थित माधोबाड़ी निवासी संदीप झावर ने शिकायत दर्ज कराई है। संदीप मैसर्स वैगमाइन इंटरप्राइजेज फर्म में पार्टनर हैं। उनकी फर्म मैसर्स आरपीपी इन्फ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड कंपनी से सबलेट लेकर जिले में जिला कारागार का निर्माण कार्य कर रही है। संदीप झावर ने बताया कि दस्तावेजों की जांच के दौरान उन्हें साइट पर धोखाधड़ी की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपने पार्टनर पंकज गोयल (रामपुर बाग, थाना कोतवाली, बरेली निवासी) के साथ 3 नवंबर को निर्माणाधीन साइट का दौरा किया। जांच में पता चला कि साइट पर रेत, बजरी और गिट्टी की गाड़ियां कम आ रही थीं, लेकिन दस्तावेजों में फर्जी एंट्री और फर्जी काटा पर्ची लगाकर अधिक माल दिखाया जा रहा था। यह धोखाधड़ी निर्माण सामग्री की आपूर्ति में की जा रही थी। शिकायत के अनुसार, सप्लायर मैसर्स सनप्रीत सिंह (मालिक सनप्रीत सिंह), मैसर्स हरमिंदर सिंह कॉन्ट्रैक्टर (मालिक हरमिंदर सिंह), मैसर्स एमबी इंटरप्राइजेज (मालिक बबीता कौर) और ट्रांसपोर्टर डीके तेवतिया की मिलीभगत से यह कार्य किया गया। इसमें कंपनी के कर्मचारी अंकित सिंह, राजा, लोपेंद्र, राम सिंह, अभिषेक, ऋषि और गार्ड रामवीर व अमर सिंह भी शामिल थे। इन सभी ने मिलकर कंपनी के साथ लगभग चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। संदीप झावर ने बताया कि 13 सितंबर से 15 सितंबर तक की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। 3 नवंबर को प्रोजेक्ट मैनेजर रघुनाथ और डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर दिनेश को चेतावनी देकर 20 सितंबर से आगे की सीसीटीवी फुटेज मांगी गई थी। हालांकि, 4 नवंबर को जब कंपनी के कर्मचारी साइट पर पहुंचे, तो सीसीटीवी फुटेज का डीबीआर कमरे से गायब मिला। आरोप है कि दस्तावेज मांगने पर आरोपियों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी भी दी। थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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