पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर निजी वीडियो वायरल करने और अवैध वसूली के एक गंभीर मामले में ट्रैफिक मैनेजर शशांक शेखर को 25 दिन बाद भी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। आरोपी की गिरफ्तारी न होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में 10 दिसंबर को चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने 11 दिसंबर को टोल मैनेजर आशुतोष सरकार, सिस्टम टेक्निशियन आशुतोष तिवारी और इंजीनियर प्रमोद कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। प्रोजेक्ट मैनेजर अभिषेक चौहान ने फरार आरोपी और जेल भेजे गए सभी आरोपियों को बर्खास्त कर दिया है। यह मामला गाजीपुर के एक नवविवाहित जोड़े के निजी वीडियो से जुड़ा है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर लगे सीसीटीवी कैमरों से उनका वीडियो रिकॉर्ड किया गया था। दंपति ने टोल प्लाजा से पहले अपनी कार रोकी थी, जिसके निजी पलों का वीडियो एक्सप्रेस-वे के ATMS (एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) के असिस्टेंट मैनेजर ने बना लिया था। आरोपी मैनेजर ने मौके पर पहुंचकर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर जोड़े को ब्लैकमेल किया और उनसे 32 हजार रुपये वसूल लिए। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। जांच में सामने आया है कि यह शादीशुदा जोड़ा मैनेजर का इकलौता शिकार नहीं था; पांच से छह अन्य लोग भी इस ब्लैकमेलिंग का शिकार हुए थे। स्थानीय लोगों ने इस मामले की लिखित शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सुल्तानपुर के डीएम-एसपी और एक्सप्रेस-वे के अधिकारियों से की थी। यह घटना पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के हलियापुर स्थित टोल प्लाजा की है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया था कि आरोपी ने टोल प्लाजा के आसपास के तीन गांवों की कई महिलाओं और लड़कियों के भी फुटेज बनाए थे और उन्हें ब्लैकमेल किया था।
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