मेरठ के लोकप्रिय अस्पताल की घटना ने पूरी चिकित्सीय व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। संजय ICU में एडमिट थे, जिस कारण उनकी समस्त जिम्मेदारी उस वक्त वहां तैनात स्टाफ की थी। परिवार को भी केवल निर्धारित समय पर ही मिलने दिया जाता था। ऐसे में सवाल यह है कि संजय खुद टॉयलेट में कैसे चले गए। अगर किसी स्टाफ के द्वारा भी उन्हें वहां ले जाया गया था तो फिर संजय ने अंदर से दरवाजा कैसे लगा लिया? फिलहाल पुलिस जांच कर रही है। पहले देखें यह तीन तस्वीरें… पहले जानते हैं क्या है पूरी घटना मूलरूप से हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर कांगड़ा निवासी संजय कुमार अपनी पत्नी ज्योति व एक बेटे शुभांक के साथ यहां हाईडिल कालोनी के पास रहते आ रहे थे। पिछले कुछ दिन से संजय की तबियत खराब चल रही थी, जिनका इलाज डा. पीके शुक्ला की देखरेख में चल रहा था। सांस लेने में दिक्कत की शिकायत थी। टेस्ट में खून की कमी आई और डाक्टर ने संजय को खून चढ़ाने की सलाह दी। 31 दिसंबर की देर रात संजय को गढ़ रोड स्थित लोकप्रिय अस्पताल में भर्ती करा दिया गया, जहां उनका ICU में इलाज चल रहा था। 15 मिनट पहले ही घर गई थी ज्योति ज्योति ने बताया कि रात को जब वह घर खाना खाने जाती थी तो स्टाफ को बताकर जाती थी। क्योंकि वैसे भी स्टाफ अंदर जाने नहीं देता था। घर पहुंची ही थी कि अस्पताल से फोन आ गया। कॉलर ने बताया कि उनके पति की दूसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई है। वह उल्टे पॉव भागी तो देखा सबकुछ खत्म हो चुका था। संजय जहां गिरे वहां खून ही खून था। पुलिस भी पहुंच चुकी थी। ज्योति का आरोप है कि उस 15 मिनट के अंतराल में ही कुछ ऐसा हुआ है, जिसे छिपाने का प्रयास हो रहा है। खून चढ़ाने के लिए ICU में रखा ज्योति अस्पताल पर गंभीर आरोप लगा रही हैं। बोली- चार यूनिट खून के लिए उसके पति की जान ले ली गई। सवाल उठाए कि क्या शरीर का चार यूनिट खून कम होने से कोई व्यक्ति इतनी क्रिटिकल कंडीशन में पहुंच जाता है कि उसे ICU में रखना पड़ता है। संजय को कोई बीमारी नहीं थी। इसके बावजूद उन्हें मिलने नहीं दिया जाता था। हॉस्पिटल का बड़ा बिल बनाने के लिए यह पूरा ड्रामा रचा गया और अब वह अपने पति की लाश लेकर जा रही है। खिड़की इतनी ऊंची तो कैसे कूदे संजय ज्योति की मानें तो संजय को तीन यूनिट खून चढ़ चुका था और चौथा यूनिट खून शनिवार को चढ़ना था। उससे पहले ही संजय की मौत हो गई। संजय की हालत से वह वाकिफ थीं, इसलिए सवाल उठा रही हैं। ज्योति का सवाल है कि इतनी कमजोरी में संजय बाथरूम की खिड़की तक कैसे चढ़े। खिड़की के आस पास खून लगा है। इसका मतलब गिरने से पहले ही संजय के शरीर से खून निकल रहा था। सबसे बड़ी बात कि ICU के स्टाफ को कांच टूटने और संजय के नीचे गिरने की भनक क्यों नहीं लगी। वह तो नीचे लोगों ने शोर मचाया, तब स्टाफ दौड़ा। हंसी ठहाके के बीच गुजरा पूरा दिन संजय दो बहन और चार भाई थे। उनकी तबियत खराब होने की सूचना पर शुक्रवार सुबह दिल्ली में रहने वाली उनकी दोनों बहने भी आई थीं। संजय की हालत में सुधार देखकर वह संतुष्ट थीं। संजय भी हंस हंसकर अपनी बहनों से बात कर रहे थे। लेकिन क्या पता था कि वह भाई-बहनों की वह आखिरी मुलाकात थीं। बहनें शाम को अपने घर पहुंची भी नहीं थी कि संजय की मौत की सूचना उनसे पहले घर पहुंच गई। रात में ही परिजन मेरठ के लिए रवाना हो गए। फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी रात में लोकप्रिय अस्पताल पहुंचे थे। उनके साथ इंस्पेक्टर नौचंदी ईलम सिंह भी रहे। उन्होंने ICU के स्टाफ से पूछताछ की और फिर फोरेंसिक टीम को बुला लिया। फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और लौट गई। तब तक बाथरूम और खून वाले स्थान तक किसी को जाने नहीं दिया गया। परिवार के तीन महत्वपूर्ण सवाल… 1. संजय जब ICU में थे तो बाथरूम का अंदर से दरवाजा क्यों लगने दिया।
2. इस कमजोरी की स्थिति में बिना किसी सहारे के संजय खिड़की तक कैसे चढ़े।
3. हादसे के बाद रात्रि शिफ्ट में काम करने वाले स्टाफ को क्यों हटा दिया गया।
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