दहियार रन्ना पंचायत के शहरू गांव में आयोजित सार्वजनिक बम पूजा के अवसर पर 56 गांवों की संयुक्त बम पूजा समिति के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन। तीसरे दिन शुक्रवार को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के अद्भुत संगम का साक्षी बना। प्रवचन करते कथावाचक प्रोफेसर आचार्य जयशंकर झा ने प्रवचन के दौरान कहा कि भगवान को अपनी कथा से भी अधिक प्रिय अपने भक्तों की कथा होती है। उनके ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कथावाचक प्रोफेसर जयशंकर झा ने श्रीमद्भागवत के 12 स्कंधों का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि आठवें स्कंध तक मुख्य रूप से भगवान के महाभागवत भक्तों की कथाएं ही प्रधान हैं। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित, ध्रुव, प्रह्लाद और जड़भरत जैसे भक्तों का जीवन आज भी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। शापग्रस्त राजा परीक्षित ने मृत्यु के भय को अवसर में बदलते हुए सात दिनों के भीतर आत्मकल्याण का मार्ग अपनाया, वहीं मात्र पाँच वर्ष की आयु में बालक ध्रुव ने कठोर तपस्या कर अपने जीवन को संवार लिया। ये कथाएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकाश स्तंभ के समान हैं। प्रवचन के क्रम में आचार्य झा ने जड़भरत की साधुता और उनकी रक्षा के प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया। झांकी के दौरान पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा झांकी के दौरान पूरा पंडाल जयकारों और तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. बचनेश्वर झा ने किया, जबकि पारायण का दायित्व पंडित हरे राम मिश्र ने निभाया। आयोजन को सफल बनाने में बम पूजा समिति के अध्यक्ष मदन कुमार सिंह, सचिव पलटू सिंह, राम गुलाम सिंह, संजय कुमार सिंह, ललित मंडल सहित अन्य सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। समिति सदस्यों ने बताया कि कथा ज्ञान यज्ञ के आगामी दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है।शहरू गांव में आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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