अलीगढ़ के मीनाक्षी पुल के नीचे स्थित 100 वर्ष पुरानी रामदेवी धर्मशाला को गिराने पहुंची नगर निगम की टीम को विरोध का सामना करना पड़ा। अभिनेता भारत भूषण परिवार की बताई जाने वाली इस धर्मशाला में लगभग 40 परिवार रह रहे हैं। शुक्रवार को जैसे ही नगर निगम के अधिकारी जर्जर और गिरासू घोषित हो चुकी धर्मशाला को गिराने के लिए पहुंचे जमकर हंगामा हुआ। सड़क पर ही बैठ गईं महिलाएं नगर निगम की कार्रवाई का विरोध करते हुए धर्मशाला में रहने वाले परिवारों की महिलाएं सड़क पर ही धरने पर बैठ गईं। महिलाओं ने कड़ाके की ठंड में बेघर होने और हाईकोर्ट में लंबित याचिका का हवाला देकर कार्रवाई रोकने की मांग की। लेकिन अधिकारियों का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश पर ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। करीब दो घंटे तक चले हंगामे के बाद अधिकारी 12 जनवरी तक धर्मशाला खाली करने के निर्देश देकर लौट गए। देश के विभाजन के समय से रह रहे हैं लोग रामदेवी धर्मशाला में देश के विभाजन के समय से लगभग 40 परिवार किराए पर रहे हैं। इन परिवारों की तीन पीढ़ियां इसी धर्मशाला में रह चुकी हैं। धर्मशाला के बाहर की ओर करीब 12 दुकानें भी किराए पर संचालित हैं। नगर निगम ने भवन की जर्जर हालत को देखते हुए धारा 325 के तहत 10 अक्टूबर 2024 को पहला नोटिस जारी किया था। इसके बाद भी लोग यहां रह रहे थे, जिसको लेकर कई बार विवाद और प्रदर्शन हो चुके हैं। हाईकोर्ट से हुआ ध्वस्तीकरण का आदेश सहायक नगर आयुक्त वीर सिंह ने बताया कि सुरेंद्र कुमार जिंदल ने हाईकोर्ट में ध्वस्तीकरण के आदेश का अनुपालन न होने पर याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 15 मई 2025 को धर्मशाला ध्वस्त करने का आदेश दिया। इसके अनुपालन में 19 मई को टीम पहुंची थी, तब भी विरोध हुआ था। 20 मई को महिलाओं ने रामघाट रोड पर सांसद की कार के आगे लेटकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद मामला कुछ समय के लिए ठंडे बस्ते में चला गया। बाद में 28 मई, 19 जुलाई, 10 नवंबर और 19 नवंबर 2025 को दोबारा नोटिस जारी किए गए। इसी आदेश के तहत शुक्रवार को एसीएम द्वितीय दिग्विजय सिंह, सीओ सिविल लाइन पुलिस और पीएसी बल के साथ सुबह करीब 11 बजे टीम धर्मशाला पहुंची। टीम को देखते ही महिलाएं बाहर आ गईं और सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया। फर्जी दस्तावेजों का बनाया आधार मामले की जानकारी पर अखंड भारत हिंदू सेना के संस्थापक दीपक शर्मा आजाद समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ध्वस्तीरण की कार्रवाई का विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी। इसके अलावा अपर नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि विपक्षी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ध्वस्तीकरण के आदेश हासिल किए हैं। उन्होंने कहा कि अगर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई तो कार्यकर्ता सड़कों पर धरने के लिए विवश होंगे। 12 जनवरी तक की दी मोहलत नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि धर्मशाला 70 प्रतिशत तक खाली हो चुकी है। निवासियों ने ठंड और हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई का हवाला देकर समय मांगा है। उनकी मांग को हाईकोर्ट के समक्ष रखा जाएगा। फिलहाल सभी परिवारों को 12 जनवरी 2026 तक धर्मशाला खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
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