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जीजा की डिग्री पर फर्जी कॉर्डियोलॉजिस्ट बना था अभिनव सिंह:ललितपुर कोर्ट ने न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ाई

अमेरिका में रहने वाले अपने जीजा, प्रसिद्ध कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव गुप्ता की डिग्री और पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज करने वाले अभिनव सिंह की न्यायिक हिरासत 14 दिन और बढ़ा दी गई है। ललितपुर न्यायालय ने विवेचक की मांग पर यह आदेश पारित किया। अब आरोपी 14 जनवरी तक जेल में रहेगा, जब मामले की अगली सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान विवेचक ने न्यायालय के समक्ष फर्जीवाड़े से जुड़े कई अहम दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। इनमें नौ फर्जी आधार कार्ड, पहचान संबंधी अभिलेख और नियुक्ति से जुड़े कागजात शामिल हैं, जिन्हें गंभीर मानते हुए अदालत ने रिमांड बढ़ाने का निर्णय लिया। जीजा के मेडिकल डिग्री और पहचान का इस्तेमाल कोतवाली सदर क्षेत्र के तालाबपुरा निवासी अभिनव सिंह ने वर्ष 2022 में एनआरएचएम योजना के तहत ललितपुर में कॉर्डियोलॉजिस्ट के पद पर नियुक्ति हासिल की थी। जांच में सामने आया कि उसने अपने अमेरिका में रह रहे जीजा डॉ. राजीव गुप्ता की मेडिकल डिग्री और पहचान का इस्तेमाल किया। शुरुआत में उसकी तैनाती जिला अस्पताल के एनसीडी सेल में की गई थी। बाद में जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद वह मेडिकल कॉलेज में भी मरीजों का इलाज कर रहा था। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब डॉ. राजीव गुप्ता की पत्नी सोनाली सिंह ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को लिखित शिकायत दी। उन्होंने बताया कि अभिनव सिंह उनके पति की पहचान और शैक्षणिक दस्तावेजों का दुरुपयोग कर खुद को डॉक्टर बताकर कार्य कर रहा है। शिकायत सामने आते ही अभिनव सिंह ने व्हाट्सएप के माध्यम से मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को इस्तीफा भेज दिया, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने 12 दिसंबर को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पहले भी विवादों में रहा है आरोपी नोट टू एडिटर:बताया जाता है कि अभिनव सिंह का आपराधिक इतिहास भी रहा है। वह पूर्व में कस्टम विभाग में अधिकारी के रूप में कार्यरत था। उसने आईआईटी रुड़की से बीटेक किया था और आईआरएस अधिकारी के रूप में चयनित हुआ था। वर्ष 1992 में मद्रास कस्टम अफसर के रूप में नियुक्ति हुई, बाद में वह मुंबई में कस्टम अफसर रहा। वर्ष 1999 में उस पर एफआईआर दर्ज हुई, जिसके बाद वह फरार हो गया था। वर्ष 2019 में मुंबई सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया, और लगभग डेढ़ वर्ष बाद 2021 में उसे जमानत मिली थी। फिलहाल पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं।


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