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रामभक्ति में डूबा अयोध्या का पाटोत्सव:सुरेश वाडकर की तान पर झूमे श्रद्धालु, पांच दिवसीय प्रतिष्ठा द्वादशी समारोह का हुआ समापन

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा आयोजित द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी (पाटोत्सव) समारोह के पांचवें और अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य समापन सुप्रसिद्ध भजन गायक सुरेश वाडकर और उनकी पत्नी पद्मा वाडकर की भावपूर्ण प्रस्तुति के साथ हुआ। उनकी संगीतमय प्रस्तुति ने पूरे पंडाल को भक्ति रस में डुबो दिया। कार्यक्रम की शुरुआत बधाई गीत “जन्मे हैं राम रघुरैया, अवधपुर में बाजे बधइया” से हुई और समापन रामचरितमानस की चौपाई “मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सो दसरथ अजिर बिहारी” के साथ हुआ। रामलला के जन्मोत्सव पर प्रस्तुत “राजा दशरथ गईया लुटावें…” सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो उठे। इसके बाद सुरेश वाडकर ने कबीर दास की रचना “राम नाम तू भज ले प्यारे” और अपने प्रसिद्ध भजन “इतनी शक्ति हमें देना दाता” से खूब तालियां बटोरीं। फिल्म राम तेरी गंगा मैली का शीर्षक गीत प्रस्तुत होते ही पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद “मेघा रे मेघा रे”, “विट्ठल विट्ठल नाम प्रेम भाव” और “ओ रे राही तुझे जाना है अयोध्या नगरिया” ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। पांचवें और अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की कड़ी में शालीना चतुर्वेदी समूह ने महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की अमर कृति “राम की शक्ति पूजा” का कथक नृत्य शैली में जीवंत मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंगद टीला स्थित मंच पर प्रस्तुति के दौरान भाव, भंगिमा, हस्त मुद्राएं और पद संचलन का सधा हुआ संयोजन दर्शनीय रहा। चरम क्षण पर देवी दुर्गा का आशीर्वाद “हे राम विजय हो तेरी” संपूर्ण पंडाल को भक्ति और ऊर्जा से भर गया। प्रस्तुति की शुरुआत हनुमान चालीसा पर नृत्य के साथ हुई, जिसे बजरंगबली को समर्पित किया गया। इसके बाद राम की शक्ति पूजा के कथानक को क्रमशः सजीव किया गया। राम-रावण युद्ध के मध्य रावण के प्रचंड पराक्रम से रामदल में उत्पन्न संकट, प्रभु श्रीराम की चिंता और धैर्य, तथा जामवंत द्वारा शक्ति आराधना का सुझाव। इन सभी प्रसंगों को कथक की लयात्मकता में प्रभावी ढंग से उकेरा गया। कथा के अनुसार, रावण पर विजय हेतु प्रभु श्रीराम शक्ति की आराधना करते हैं। देवी द्वारा परीक्षा स्वरूप एक कमल पुष्प हटाए जाने पर राम का धैर्य और संकल्प और प्रखर हो उठता है। ‘कमल नयन’ की स्मृति के साथ प्रभु का नेत्र अर्पण करने का भाव दर्शाया गया, तभी देवी प्रसन्न होकर प्रकट होती हैं, प्रभु को विजय का आशीर्वाद देती हैं और उनके शरीर में लीन हो जाती हैं। शक्ति से सशक्त होकर प्रभु श्रीराम रावण का वध करते हैं और माता जानकी के साथ अयोध्या लौटते हैं। यह दृश्य दर्शकों के लिए भावनात्मक शिखर रहा। शालीना चतुर्वेदी के नेतृत्व में वैष्णवी, ऋषिका, प्रशांत कुमार, इरा गिरि, ख्रिस्टीना कश्यप दास, मेघा कुमारी, संतोषी साहिस, श्रेष्ठा शंकर, राजर्षि नीलरुचि और तनुष्का पाण्डेय ने सशक्त अभिनय से प्रस्तुति को स्मरणीय बनाया। कार्यक्रम का संचालन देशदीपक मिश्र ने किया। अंत में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से गोपाल राव ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया। मंच पर ट्रस्ट महासचिव चम्पत राय सहित राजेंद्र सिंह पंकज, धनंजय पाठक, डॉ. चंद्र गोपाल पाण्डेय, डॉ. अनिल मिश्र, नरेन्द्र, कप्तान केके तिवारी, विनोद श्रीवास्तव, भोलेन्द्र और वीरेंद्र उपस्थित रहे।


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