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PRAGATI @ 50: फाइलों की धूल से फैसलों की रफ्तार तक, मोदी मॉडल के दमदार प्रदर्शन ने बदली देश के बुनियादी ढांचे के विकास की तस्वीर

भारत सरकार की बहुचर्चित PRAGATI (Pro-Active Governance and Timely Implementation) पहल ने 50 समीक्षाओं का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा कर लिया है। इस अवसर पर विस्तृत मीडिया ब्रीफिंग में कैबिनेट सचिव टी. वी. सोमनाथन के नेतृत्व में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने लगभग दो घंटे तक परियोजनाओं, योजनाओं और शिकायत निवारण से जुड़े हर पहलू पर खुलकर जानकारी दी और मीडिया के सभी सवालों के जवाब दिए।
हम आपको याद दिला दें कि PRAGATI मंच की परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मार्च 2015 को की थी, जिसका उद्देश्य लंबे समय से अटकी सार्वजनिक परियोजनाओं, योजनाओं और नागरिक शिकायतों को तकनीक आधारित, समयबद्ध और जवाबदेह शासन मॉडल के जरिए गति देना था। इस मंच के माध्यम से केंद्र और राज्य स्तर पर समन्वय की पुरानी समस्याओं को दूर किया गया।
कैबिनेट सचिव सोमनाथन ने बताया कि अब तक PRAGATI/PMG पोर्टल पर 3,300 से अधिक परियोजनाएँ, जिनकी कुल लागत 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, उनकी समीक्षा की जा चुकी है। इसके साथ ही 61 प्रमुख सरकारी योजनाएँ, जैसे वन नेशन-वन राशन कार्ड, पीएम जन आरोग्य योजना, पीएम आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन आदि और 36 सेक्टरों से जुड़ी नागरिक शिकायतों की निगरानी भी इसी मंच से की गई।
उन्होंने बताया कि अब तक 7,735 मुद्दे उठाए गए, जिनमें से 7,156 मुद्दों का समाधान किया जा चुका है, यानी लगभग 73 प्रतिशत समाधान दर है। उन्होंने बताया कि PRAGATI के अंतर्गत प्रधानमंत्री द्वारा प्रत्यक्ष रूप से समीक्षा की गई 382 परियोजनाओं में 3,187 मुद्दे सामने आए, जिनमें से 2,958 मुद्दों का समाधान हुआ। यानि औसतन हर कार्यदिवस में एक बड़ी समस्या का समाधान इस प्रणाली के जरिए संभव हुआ।
सेक्टर-वार देखें तो प्रधानमंत्री द्वारा समीक्षा की गई परियोजनाओं में सबसे अधिक हिस्सेदारी सड़क और राजमार्ग (114 परियोजनाएँ), रेलवे (109) और बिजली (54) क्षेत्र की रही। इसके अलावा पेट्रोलियम, कोयला, आवास एवं शहरी कार्य, जल शक्ति, स्वास्थ्य और विदेश मामलों से जुड़ी परियोजनाएँ भी शामिल रहीं।
PRAGATI के प्रभाव को दर्शाने वाले प्रमुख उदाहरणों में जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और बोगीबील रेल-सड़क पुल जैसे दशक भर से अटके प्रोजेक्ट शामिल हैं, जिन्हें PRAGATI के हस्तक्षेप के बाद निर्णायक गति मिली और इन्हें समयबद्ध रूप से पूरा किया गया।
उन्होंने बताया कि कैपेक्स के मोर्चे पर भी तस्वीर बदली है। 2014-15 में जहां पूंजीगत व्यय 1.97 लाख करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 (BE) में यह बढ़कर 11.21 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। PSU के आंतरिक एवं बाहरी संसाधनों से होने वाला कैपेक्स भी 4.26 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है।
इसके अलावा, रेल मंत्रालय में पिछले दशक में 370 प्रतिशत कैपेक्स वृद्धि, 98 प्रतिशत ब्रॉडगेज नेटवर्क का विद्युतीकरण, 31,000 किमी नई पटरियाँ, और 68 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें शुरू होना इसी प्रणाली का प्रत्यक्ष परिणाम है। 
सड़क क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 60 प्रतिशत बढ़ी, निर्माण की गति तीन गुना हुई और 7.8 लाख किमी ग्रामीण सड़कें पूरी की गईं। 
साथ ही, बिजली क्षेत्र में 500 गीगावाट से अधिक स्थापित क्षमता, नवीकरणीय ऊर्जा में 300 प्रतिशत वृद्धि और बिजली की कमी को 4.2 प्रतिशत से घटाकर 0.1 प्रतिशत करना उल्लेखनीय उपलब्धियाँ रहीं। 
PRAGATI ही मोदी की प्रतिबद्धता है 
देखा जाए तो PRAGATI महज़ एक समीक्षा प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि भारत की शासन संस्कृति में आया वह निर्णायक मोड़ है जिसने “फ़ाइलों की धूल” को “फ़ैसलों की रफ्तार” में बदल दिया। दशकों तक भारत में परियोजनाएँ अटकती रहीं, कभी भूमि अधिग्रहण, कभी वन मंज़ूरी, कभी विभागीय खींचतान। नतीजा था लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी और जनता का टूटा भरोसा। PRAGATI ने इसी जड़ समस्या पर सीधा वार किया।
सबसे अहम बात यह है कि इस व्यवस्था के केंद्र में प्रधानमंत्री स्वयं हैं। जब देश का शीर्ष नेतृत्व नियमित रूप से राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय सचिवों से सीधे सवाल करता है, तो जवाबदेही काग़ज़ों में नहीं, ज़मीन पर उतरती है। कैबिनेट सचिव सोमनाथन और विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों का दो घंटे तक मीडिया के सामने बैठकर हर आंकड़े, हर सवाल और हर आलोचना का जवाब देना इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार “विकसित भारत” के नारे को प्रचार नहीं, प्रशासन का एजेंडा मानती है।
देखा जाए तो PRAGATI की असली ताकत इसकी सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ वाली अवधारणा है। कोई बहाना नहीं, कोई डेटा छिपाने की गुंजाइश नहीं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के सईद बिज़नेस स्कूल ने भी इसे वैश्विक स्तर पर डिजिटल गवर्नेंस का बेस्ट प्रैक्टिस मॉडल माना है। साथ ही PRAGATI मंच सहकारी संघवाद को नारे से निकालकर व्यवहार में उतारता है, जहां केंद्र और राज्य एक-दूसरे पर दोष मढ़ने की बजाय समाधान निकालने के लिए साथ बैठते हैं।
सेक्टर-वार उपलब्धियाँ साफ बताती हैं कि विकास अब घोषणाओं का मोहताज नहीं। सड़कें तेज़ी से बन रही हैं, रेल नेटवर्क आधुनिक हो रहा है, बिजली हर घर तक भरोसे के साथ पहुँच रही है और हवाई अड्डे भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से खड़े हो रहे हैं। यह वही भारत है जो कभी “लेट लतीफ़” सिस्टम के लिए बदनाम था और आज समयबद्ध निष्पादन की मिसाल बन रहा है।
आलोचक चाहे जितने सवाल उठाएँ, लेकिन सच्चाई यह है कि PRAGATI ने शासन को जवाबदेह, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाया है। यही कारण है कि यह पहल सिर्फ परियोजनाएँ नहीं, भारत का भरोसा भी डिलीवर कर रही है। विकसित भारत का रास्ता भाषणों से नहीं, ऐसे ही प्लेटफॉर्म्स से होकर गुजरता है और PRAGATI इस रास्ते की सबसे मज़बूत कड़ी बन चुका है।
~नीरज कुमार दुबे


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