मुजफ्फरनगर में ट्रांसपोर्टरों ने भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक सहित पदाधिकारियों पर प्रति ट्रक 10 हजार रुपये मासिक ‘पर्ची’ (रंगदारी) मांगने का आरोप लगाया। ट्रांसपोर्टरों ने शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट पर इकट्ठा होकर जिलाधिकारी (डीएम), वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) और एसपी ट्रैफिक से तत्काल कार्रवाई की मांग की। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार, यह घटना नए साल के पहले दिन (1 जनवरी) को हुई। नई मंडी कोतवाली क्षेत्र में दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे-58 पर स्थित बीवीपुर पुलिस चौकी के पास भाकियू अराजनीतिक के कार्यकर्ताओं ने आरडीएफ (रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) ले जा रहे ट्रकों को जबरन रोक लिया। उन्होंने प्रति ट्रक 10 हजार रुपये मासिक रंगदारी की मांग की। ट्रांसपोर्टरों ने सवाल उठाया कि यदि आरडीएफ गलत है, तो इसकी जांच फैक्ट्री मालिकों या आरडीएफ आपूर्तिकर्ताओं पर होनी चाहिए, न कि ट्रांसपोर्टरों को परेशान किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गलत या गैरकानूनी सामान ले जाने वाले ट्रकों को रोकने और उन पर कार्रवाई करने का अधिकार केवल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का है, किसी यूनियन या व्यक्ति विशेष का नहीं। उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि ट्रांसपोर्टरों को बेवजह परेशान न किया जाए। यदि आरडीएफ में कोई अनियमितता है, तो कार्रवाई आरडीएफ आपूर्तिकर्ताओं या संबंधित फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ की जाए। ट्रांसपोर्टरों ने अपनी अन्य समस्याओं को भी अधिकारियों के सामने रखा और त्वरित समाधान की मांग की। इस दौरान एक ट्रांसपोर्टर ने कहा कि धर्मेंद्र मलिक खुद को राकेश टिकैत जैसा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसा संभव नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि राकेश टिकैत जैसा बनने के लिए उनके जैसे गुणों का होना आवश्यक है। ट्रांसपोर्टरों ने एक दिन पहले बीवीपुर पुलिस चौकी के पास पत्रकारों के साथ हुए विवाद के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ, वह अनजाने में था और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। ट्रांसपोर्टरों ने डीएम, एसएसपी और एसपी ट्रैफिक से तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यूनियन के नाम पर रंगदारी वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ट्रांसपोर्टरों ने कहा कि “वे कानूनी रूप से सामान ढो रहे हैं, उनकी परमिशन वैध है। फिर भी उन्हें परेशान किया जा रहा है। ट्रांसपोर्टरों के प्रतिनिधिमंडल में कई ट्रक यूनियन के पदाधिकारी और ड्राइवर शामिल रहे, जिनमें हरमीत सिंह, विकास कुमार, माहुल सिंह, गुरमेल सिंह, गुरमीत सिंह, सुहेल, कुशल पाल सिंह, संजीव कुमार, संदीप सिंह, सुधीर कुमार, फरमान, इरफान, हेमंत मलिक, गौरव अहलावल, राहुल और सौरभी चौधरी आदि समेत कई ट्रांसपोटर्स शामिल रहे। उन्होंने सामूहिक रूप से अपनी बात रखी और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। यह मामला आरडीएफ के जलाने से जुड़े प्रदूषण विवाद से जुड़ा है। किसान संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं। मिल मालिक आरडीएफ को जरूरी बता रहे हैं। बीच में ट्रांसपोर्टर फंस गए हैं, जिन्हें दोनों तरफ से दबाव झेलना पड़ रहा है।
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