पीलीभीत में महिंद्रा फाइनेंसियल सर्विसेज के साथ लाखों रुपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। फर्जी एनओसी (NOC) बनाकर एक वाहन को हड़प लिया गया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सुनगढ़ी थाने में धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इस पूरे प्रकरण में एआरटीओ कार्यालय के कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। महिंद्रा फाइनेंसियल सर्विसेज के एरिया लीगल मैनेजर सचिन खंडारी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी कंपनी व्यावसायिक और वाहन ऋण प्रदान करती है। कंपनी ने बीसलपुर थाना क्षेत्र के किशनपुर निवासी जसवंत सिंह पुत्र टीकाराम को एक बड़े वाहन के लिए ऋण दिया था। नियमानुसार, वाहन के कागजात पर फाइनेंस कंपनी का ‘हाइपोथेकेशन’ (HP) दर्ज था। आरोप है कि जसवंत सिंह ने वाहन लेने के बाद किस्तों का भुगतान समय पर नहीं किया। बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद उसने कंपनी के 18 लाख 82 हजार 435 रुपये की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया। कंपनी द्वारा की गई आंतरिक जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी जसवंत सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर कंपनी के अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर किए और वाहन की फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तैयार कर ली। इस फर्जी NOC के आधार पर आरोपी ने एआरटीओ कार्यालय से वाहन का हाइपोथेकेशन हटवा दिया। जालसाजी यहीं नहीं रुकी; एआरटीओ कार्यालय की कथित मिलीभगत से आरोपी ने उक्त वाहन को अर्शी नामक व्यक्ति के नाम पर स्थानांतरित भी करवा दिया। कंपनी का आरोप है कि एआरटीओ कार्यालय के कर्मचारियों की संलिप्तता के बिना इतनी बड़ी धोखाधड़ी संभव नहीं थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सुनगढ़ी थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। प्रभारी निरीक्षक सुनगढ़ी, नरेश त्यागी ने बताया कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। एआरटीओ कार्यालय और आरोपी के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की गिरफ्तारी और कार्रवाई की जाएगी।
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