किशनगंज में रेलवे गाइड बांध निर्माण के लिए अधिगृहीत भूमि के मुआवजे को लेकर भू-दाताओं में नाराजगी है। भू-अर्जन कार्यालय ने मुआवजे की राशि चार गुना से घटाकर दो गुना कर दी है, जिसके विरोध में भू-दाताओं ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। यह मामला ठाकुरगंज अंचल के मौजा पौआखाली, थाना नंबर 222 से संबंधित है। शुक्रवार को एक दर्जन से अधिक भू-दाताओं ने जिलाधिकारी से मिलकर भू-अर्जन कार्यालय के इस फैसले का विरोध किया और नियमानुसार मुआवजे की मांग की। भूमि को ‘विकासशील’ प्रकृति का दर्शाया गया जिलाधिकारी को सौंपे गए आवेदन में भू-दाताओं ने बताया कि भू-अर्जन कार्यालय द्वारा धारा 37 के तहत जारी नोटिस में उनकी भूमि को ‘विकासशील’ प्रकृति का दर्शाया गया है। जबकि उनकी जमीनें आवासीय प्रकृति की हैं और सड़क के किनारे स्थित हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में निबंधन विभाग द्वारा भी उनकी भूमि का निबंधन आवासीय प्रकृति के आधार पर ही किया जा रहा है। प्रकृति, दर और रकबे के संबंध में आपत्ति दर्ज करने का दिया गया था निर्देश भू-दाताओं के अनुसार, जारी नोटिस में भूमि की प्रकृति, दर और रकबे के संबंध में आपत्ति दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इसके जवाब में ग्रामीणों ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और विभागीय नियमों के अनुसार भूमि की प्रकृति निर्धारित करने तथा प्रचलित बाजार दर के आधार पर मुआवजा भुगतान करने का अनुरोध किया। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 26 दिसंबर 2025 को जब भू-दाता भू-अर्जन पदाधिकारी से मिले, तो उन्हें बताया गया कि इस मामले में वे कुछ नहीं कर सकते और उन्हें प्राधिकार (अथॉरिटी) के पास जाना होगा। भू-दाताओं ने सवाल उठाया कि यदि उन्हें प्राधिकार के पास ही भेजना था, तो उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए 21/2 का नोटिस क्यों जारी किया गया। 80,000 रुपए प्रति कट्ठा के हिसाब से दो गुना मुआवजा मिलेगा पदाधिकारी ने भू-दाताओं को यह भी बताया कि चूंकि यह मौजा नगर पंचायत क्षेत्र में आता है, इसलिए उन्हें 80,000 रुपए प्रति कट्ठा के हिसाब से दो गुना मुआवजा मिलेगा। जमीन का बाजार मूल्य 4 से 5 लाख रुपए प्रति कट्ठा भू-दाताओं ने अपनी शिकायत में कहा कि इसी परियोजना के तहत पहले उन्हें इसी स्थान की भूमि के लिए आवासीय प्रकृति के आधार पर चार गुना मुआवजा मिला था। हालांकि, अब उन्हें दो गुना मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि एमवीआर (न्यूनतम मूल्यांकन दर) वही है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि नगर पंचायत के आधार पर दो गुना मुआवजा दिया जा रहा है, तो एमवीआर भी नगर पंचायत के आधार पर ही निर्धारित होना चाहिए। भू-दाताओं के अनुसार, वर्तमान में इस जमीन का बाजार मूल्य 4 से 5 लाख रुपए प्रति कट्ठा है।
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