लखनऊ के बाजारखाला क्षेत्र स्थित ऐशबाग के चर्चित डबल मर्डर केस में करीब 19 साल बाद मंगलवार को बड़ा फैसला आया है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने विधायक अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया, जिससे लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का अंत हो गया।
19 साल बाद आया फैसला, सभी आरोपी दोषमुक्त
स्पेशल जज एमपी/एमएलए कोर्ट, लखनऊ के न्यायाधीश हरबंश नारायण ने इस बहुचर्चित मामले में अभय सिंह, रविन्द्र सिंह उर्फ “रज्जु”, अजय प्रताप सिंह उर्फ “अजय सिपाही” और फिरोज अहमद को दोषमुक्त करार दिया।
करीब 19 वर्षों तक चले इस मुकदमे में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर यह माना कि आरोप सिद्ध नहीं हो सके, जिसके चलते सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
2007 में हुआ था दोहरा हत्याकांड
यह मामला 31 मार्च 2007 का है, जब बाजारखाला थाना क्षेत्र के ऐशबाग इलाके में शत्रुघ्न सिंह उर्फ छोटू और जितेंद्र त्रिपाठी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
घटना के संबंध में मृतक शत्रुघ्न के पिता नारदमुनि सिंह ने देर रात करीब 11:55 बजे थाना बाजारखाला में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
एफआईआर के अनुसार, वह ईदगाह के सामने स्थित हनुमान मंदिर के पास थे, तभी उनकी टेंट हाउस की दुकान की तरफ से गोली चलने की आवाज आई।
हमलावरों ने नजदीक से की फायरिंग
शिकायत में बताया गया कि मौके पर पहुंचे तो दो युवक पिस्तौल लेकर शत्रुघ्न पर फायरिंग कर रहे थे। जब परिजन और कर्मचारी बचाने के लिए दौड़े, तो हमलावरों ने जितेंद्र त्रिपाठी पर भी गोली चला दी।
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी पहले से स्टार्ट मोटरसाइकिल पर बैठकर नाका की ओर फरार हो गए।
जांच के दौरान दाखिल हुई चार्जशीट
मामले की विवेचना के दौरान 13 अगस्त 2008 को रविन्द्र उर्फ रज्जु, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही और फिरोज अहमद के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया।
वहीं, विधायक अभय सिंह के खिलाफ अलग से धारा 302 और 120B भारतीय दंड संहिता के तहत आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।
घटना के समय जेल में थे अभय सिंह
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि घटना के दिन अभय सिंह एक एनएसए के मामले में जिला कारागार में निरुद्ध थे।
यह बिंदु भी बचाव पक्ष के तर्कों में महत्वपूर्ण रहा, जिसे अदालत ने संज्ञान में लिया।
साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने दी राहत
लंबी सुनवाई और गवाहों के परीक्षण के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल नहीं रहा।
इसी आधार पर सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।
लंबे कानूनी संघर्ष का हुआ अंत
करीब दो दशकों तक चले इस चर्चित डबल मर्डर केस में आए इस फैसले ने एक लंबे कानूनी संघर्ष को समाप्त कर दिया।
यह फैसला एक बार फिर यह दर्शाता है कि आपराधिक मामलों में सजा के लिए ठोस और पुख्ता साक्ष्य होना कितना आवश्यक है।

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