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PCS बनना चाहता था, फर्जी मुकदमे ने वकील बना दिया:झांसी का युवक बोला- पैसों की तंगी है, खुद के मुकदमे की पैरवी कर रहा

झांसी के रहने वाले युवक का सपना था कि वह PCS अफसर बनेगा। इसके लिए वह तैयारी भी कर रहा था लेकिन सदर बाजार थाने में उसके खिलाफ पुलिस ने फर्जी मुकदमा लिख दिया। जिसके चलते युवक को जेल जाना पड़ा। कानूनी लड़ाई में पैसे खर्च हो रहे थे। ऐसे में युवक ने निर्णय किया कि वह अब न्याय पाने के लिए खुद ही वकील बनेगा। युवक का कहना है कि उसे इस बात की पीड़ा है कि फर्जी मुकदमे के चलते उसका करियर खराब हो गया। युवक का कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों ने उसे फंसाया, वह उन्हें न्यायालय से सजा दिलाएगा। अब पूरी कहानी जानिए… झांसी के सदर बाजार थाना क्षेत्र के भट्टागांव के रहने वाले वीर गौतम का सपना था कि वह PCS अफसर बनेगा। इसके लिए साल 2018 में वह झांसी छोड़कर प्रयागराज चला गया था। यहां तैयारी के दौरान वीर ने अपने मोहल्ले के ही रहने वाले परिचित को 17 हजार रुपए उधार दिए थे। पैसे मांगते हुए वीर को दो साल हो गए लेकिन उधारी वापस नहीं मिली। इसके बाद उसने साल 2020 में जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। मामला सदर बाजार पुलिस के पास पहुंचा तो यहां तैनात तत्कालीन उपनिरीक्षक देवराज मौर्य ने पैसे वापस मिलने के वादे पर दोनों पक्ष का समझौता करा दिया। विपक्षी ने लेकिन पैसे वापस नहीं दिए, उल्टा अपनी पत्नी के साथ मिलकर वीर गौतम पर छेड़खानी का मुकदमा दर्ज करा दिया। बताया कि पुलिस ने उसे थाने बुलाकर बिठाए रखा और परिजनों से पैसे लेने के बाद छोड़ा। जबकि वह दर्शाई गई घटना के दिन और समय ललितपुर में था। इस मामले की शिकायत युवक के परिजनों ने डीजीपी तक की तो झांसी में खलबली मच गई। पांच साल बाद मिले CCTV फुटेज बने मददगार युवक वीर गौतम ने बताया कि उसके पास अपनी बेगुनाही साबित करने का एकमात्र रास्ता उस दिन के CCTV फुटेज थे, जब वह ललितपुर में ATM से पैसे निकाल रहा था। बताया कि ललितपुर जिलाधिकारी ने आदेश के बाद बैंक ने पांच साल बाद 18 अगस्त 2025 को फुटेज दे दिए। इन्हीं फुटेज के आधार पर युवक की बेगुनाही साबित हुई लेकिन जांच अधिकारी देवराज मौर्य ने इन फुटेज को जांच में शामिल नहीं किया। जांच के बाद तत्कालीन सीओ सिटी स्नेहा तिवारी ने माना कि IO (इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर) ने तथ्यों को जांच में शामिल नहीं किया। विभागीय जांच में उपनिरीक्षक देवराज मौर्य, कॉन्स्टेबल विजय कुमार और सतेंद्र कुमार को दोषी पाया गया। जिसके बाद उन्हें लोअर पे-ग्रेड देने की संतुष्टि की। तीनों पुलिस कर्मियों पर दर्ज हुआ केस PCS अफसर बनने की तैयारी कर रहे वीर गौतम ने बताया कि पुलिस ने उन पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर उनका करियर चौपट कर दिया तो उन्होंने ठान लिया था कि वह दोषियों को सजा दिलाकर रहेंगे। वह जब इस मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे तो न्यायालय ने जांच रिपोर्ट और सबूतों के आधार पर 4 मार्च 2025 को झांसी पुलिस को आदेश देते हुए सदर बाजार थाने में उपनिरीक्षक देवराज मौर्य, कॉन्स्टेबल विजय कुमार, सतेंद्र कुमार समेत शिकायतकर्ता मोनिका अहिरवार और उसके पति नीलेश कुमार के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज करने कराया। चार सप्ताह में हाईकोर्ट में पेश होना होगा वादी वीर गौतम ने बताया कि उच्च न्यायालय ने पुलिसकर्मियों को चार सप्ताह में कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए हैं। वीर गौतम का आरोप है कि पुलिस ने जिस प्रकार झूठी कहानी बनाकर उसे फर्जी मुकदमे में फंसाया है, वह कोर्ट के सामने साफ हो गया है। बोले, कि आरोपी बनाए गए पुलिस कर्मियों ने उसका भविष्य खराब कर दिया है। उसका कहना कि उसने PCS बनने का सपना त्याग दिया है। बोले कि मैंने वकालत भी न्याय की लड़ाई के लिए ही की है।


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