उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की सख्ती और तकनीक के दम पर जनवितरण प्रणाली (पीडीएस) में बड़ा बदलाव आया है। जीपीएस युक्त वाहनों की मदद से खाद्यान्न की ढुलाई अब पूरी तरह पारदर्शी हो गई है। खाद्यान्न वितरण में लगे 5000 से ज्यादा वाहनों में जीपीएस लगाकर गोदाम से उचित दर दुकानों तक हर बोरी पर नजर रखी जा रही है। रियल टाइम ट्रैकिंग से कालाबाजारी पर लगाम प्रदेश में खाद्यान्न उठान के लिए इस्तेमाल हो रहे 5000 से अधिक वाहनों में जीपीएस डिवाइस लगाई जा चुकी हैं। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के डिपो से उचित दर विक्रेताओं की दुकानों तक पूरा परिवहन अब रियल टाइम में ट्रैक किया जा रहा है। वाहन कब निकला, कहां रुका और समय पर पहुंचा या नहीं, सब कुछ कंट्रोल रूम में दर्ज होता है। इसकी वजह से रास्ते में अनाज की हेराफेरी और डायवर्जन शून्य हो गया। धान-मोटे अनाज खरीद में भी जीपीएस अनिवार्य खरीफ विपणन सत्र 2025-26 में धान खरीद के लिए क्रय केंद्रों से राइस मिलों तक जाने वाले 3773 वाहनों में जीपीएस लगाया गया है। इसी तरह मक्का, ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाजों के परिवहन के लिए 1428 वाहनों को जीपीएस से लैस किया गया। इससे सरकारी खरीद से भंडारण तक पूरी चेन पारदर्शी और सुरक्षित हो गई है। डोर स्टेप डिलीवरी की शुरू की व्यवस्था योगी सरकार ने ब्लॉक गोदामों की पुरानी व्यवस्था खत्म कर सिंगल स्टेज डोर स्टेप डिलीवरी मॉडल लागू किया है। अब एफसीआई डिपो से सीधे दुकानों तक अनाज पहुंच रहा है। यह काम ई-टेंडर से चुने ठेकेदारों से कराया जा रहा है, जिससे मानवीय दखल कम हुआ और जवाबदेही बढ़ी। जीपीएस ट्रैकिंग के साथ यह मॉडल पीडीएस की रीढ़ बन गया है। लाभार्थियों तक समय पर पहुंच रहा पूरा खाद्यान्न वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 8.03 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न और मोटे अनाज का आवंटन किया जा चुका है। अंत्योदय कार्डधारकों के लिए 36,850.35 मीट्रिक टन चीनी भी आवंटित हुई है। जीपीएस की वजह से यह सब बिना कटौती, बिना चोरी और सही समय पर गरीबों तक पहुंच रहा है।
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