कुशीनगर के तमकुहीराज स्थित रामलीला मैदान में मंगलवार को श्री हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर श्रीराम कथा का आयोजन किया गया। कथा के सातवें दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। जिससे पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। अयोध्या धाम से आईं कथा वाचिका साध्वी स्मिता ने भगवान श्रीराम के वनवास और भरत चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने भरत के त्याग और समर्पण की कथा सुनाई। साध्वी स्मिता ने भरत के चरित्र को त्याग, समर्पण और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का सर्वोच्च उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भरत ने सत्ता और वैभव का त्याग कर अपने बड़े भाई श्रीराम के प्रति जो प्रेम और समर्पण दिखाया, वह आज भी समाज के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने सच्चे धर्म को स्वार्थ रहित, कर्तव्य और प्रेम पर आधारित बताया। उन्होंने श्रीराम के वनवास को कठिन परिस्थितियों में धैर्य, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा बताया। साध्वी ने श्रीराम और भरत के आदर्श संबंधों को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक भी कहा। कार्यक्रम में अयोध्या के श्री हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
उन्होंने कथा आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं और सनातन संस्कृति को सशक्त करते हैं। महंत राजू दास ने कहा, “हिंदुत्व हमारी पहचान है और सनातन संस्कृति ही राष्ट्र की मजबूती का आधार है।” उन्होंने युवाओं से श्रीहनुमान जी के सेवा, शक्ति और भक्ति के आदर्शों को अपनाने का आह्वान भी किया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। कथा के माध्यम से लोगों को जीवन मूल्यों और हिंदू संस्कृति व परंपराओं के प्रति जानकारी मिली। इस अवसर पर तमकुहीराज स्टेट के राजा महेश्वर प्रताप शाही, पूर्व विधायक डॉ. पीके राय, विद्यावती देवी महाविद्यालय के प्रबंधक बबलू राय, अवधेश राय, संतोष सिंह, रमेशचंद्र यादव, सुधीर सिंह और जलेश्वर उपाध्याय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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