प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। नालंदा जिले के हिलसा नगर परिषद में वार्ड नंबर 10 के पार्षद का एक वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें वह लाभार्थी से 30 हजार रुपए की मांग करते हुए खुलेआम धमकी देते नजर आ रहे हैं। लाभार्थी ने लगाई न्याय की गुहार वार्ड संख्या 10 की निवासी सुमंता देवी, जिन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर निर्माण की स्वीकृति मिली है। उन्होंने एसडीओ हिलसा को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। आरोप है कि स्वीकृति मिलने के बाद वार्ड पार्षद शैलेंद्र कुमार उर्फ शैलू सिंह ने मोटी रकम की मांग की। जब वह राशि देने में असमर्थता जताई, तो पार्षद ने निर्माण स्थल पर पहुंचकर काम रुकवा दिया और धमकी दी। इस घटना से पूरा परिवार दहशत में है। काम बंद करने की धमकी वायरल वीडियो 29 दिसंबर का बताया जा रहा है। इसमें वार्ड पार्षद साफ शब्दों में कहते सुने जा सकते हैं, ‘तुम जहां तक आगे बढ़ोगे, उतनी ही दिक्कत तुम्हें झेलनी पड़ेगी। ना तुम्हें धनंजय मुख्य पार्षद बचाएगा और ना ही नगर परिषद। आराम से पैसा लाकर मेरे पास पहुंचा दो और काम करते रहो। नहीं तो काम बंद कर दो। 30,000 रुपए मैं लूंगा। वीडियो में पीड़िता गिड़गिड़ाते हुए कहती हैं कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं। इस पर वार्ड पार्षद का जवाब है, ‘पैसा नहीं है तो काम बंद कर दो।’ यह घटना सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करती है। प्रशासन ने शुरू की जांच हिलसा के एसडीओ अमित कुमार पटेल ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आवेदन मिला है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। आवेदन में जान से मारने की धमकी का भी उल्लेख है, इसलिए संबंधित थाने को भी इसकी जांच का जिम्मा सौंपा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। 8 फीट चौड़ी सड़क पर अतिक्रमण का आरोप आरोपों को वार्ड पार्षद शैलेंद्र कुमार ने खारिज कर दिया है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि यह मेरा वीडियो नहीं है। मैं सुमंता देवी के घर के पास जरूर गया था। मैंने केवल इतना कहा कि जो सड़क पर निर्माण सामग्री गिराकर काम किया जा रहा है, उसे समेट लें। 8 फीट चौड़ी सड़क पर मटेरियल गिराकर अतिक्रमण किया गया है। हालांकि, वायरल वीडियो में साफ तौर पर 30 हजार रुपए की मांग और धमकी सुनाई देती है, जो पार्षद के बयान को कमजोर करती है। अब जांच के बाद ही मामला स्पष्ट हो पाएगा
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