डीआईजी मेरठ परिक्षेत्र कलानिधि नैथानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से रेंज के समस्त जनपद प्रभारी, राजपत्रित अधिकारी और थाना प्रभारियों को यक्ष ऐप के उद्देश्य और क्रियान्वयन पर विस्तृत ब्रीफिंग दी। इस ऐप का लक्ष्य प्रदेश में जघन्य और सनसनीखेज अपराधों की रोकथाम करना है। उन्होंने बताया कि इस ऐप को उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री ने पुलिस मुख्यालय में लॉन्च किया था। यक्ष ऐप के जरिए किसी भी जनपद में अपराध करने वाले अपराधियों का रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा और उनका लगातार सत्यापन भी होगा। यक्ष ऐप के तहत बीट व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। हर थाना और क्षेत्र के टॉप-10 अपराधियों का चयन पारदर्शी और डेटा आधारित प्रक्रिया से किया जाएगा, जिससे उनकी निगरानी और उन पर की जाने वाली कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी। सनसनीखेज अपराधों की रोकथाम के लिए ऐप में एआई पावर्ड फेशियल रिकॉग्निशन की सुविधा है, जिससे संदिग्ध अपराधियों की पहचान आसान होगी। इसके अतिरिक्त, एआई पावर्ड वॉयस सर्च से अपराधों के अनावरण और रोकथाम में मदद मिलेगी। यह तकनीक फर्जी पहचान, नाम बदलने या फरारी की स्थिति में भी सटीक पहचान में सहायक है। किसी जघन्य या सनसनीखेज घटना के घटित होते ही, यक्ष ऐप के डेटाबेस से संभावित अपराधियों की पहचान और उनकी अद्यतन स्थिति की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो जाएगी। यह प्रक्रिया पहले से दर्ज अपराधियों की पहचान चेहरे के मिलान द्वारा करती है। किसी भी जनपद में जघन्य व सनसनीखेज अपराधों को अंजाम देने वाले सभी अपराधियों का उनके निवास थाने के आधार पर अभिलेखीकरण और लगातार सत्यापन किया जाएगा। बीट कर्मचारी प्रत्येक अपराधी का सत्यापन उसके रहने के स्थान पर जाकर करेंगे और आवश्यकतानुसार गांव/मोहल्ले के व्यक्तियों तथा परिवार के सदस्यों से बातचीत कर सही जानकारी भरेंगे। थानों की बीट व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा और “बीट के अपराधी की जिम्मेदारी बीट सिपाही के नाम” के सिद्धांत पर प्रत्येक बीट कर्मी की जवाबदेही तय होगी। इस पहल से वास्तविक सक्रिय अपराधियों, माफिया, हिस्ट्रीशीटर, जिला बदर, वांटेड और पुरस्कार घोषित अपराधियों की आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी और रोकथाम सुनिश्चित की जा सकेगी।
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