कानपुर में 80 लाख की किडनी खरीदनी वाली महिला पारुल तोमर (30) की जान खतरे में है। वहीं डॉक्टरों के मुताबिक आयुष चौधरी की हालत अभी स्थिर है। अगर समय से अच्छा इलाज नहीं मिला तो आयुष की हालत खराब हो सकती है। जिसके बाद कानपुर के हैलट PGI के डॉक्टर लखनऊ के संजय गांधी PGI में एडमिट करवाने के लिए पत्र लिख रहे हैं। GSVM मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संजय काला ने बताया हमारे यहां किडनी से संबंधित कोई इलाज नहीं है। सबसे पहले समझिए पूरा मामला पुलिस के मुताबिक, आयुष चौधरी ने पारुल तोमर को दलाल शिवम अग्रवाल के जरिए 80 लाख में किडनी बेंचने का सौदा किया था। आयुष को कल्याणपुर स्थित मेड लाइफ में किडनी का ट्रांसप्लांट किया जा रहा था। लेकिन दलाल के द्वारा तय रकम आयुष को नहीं मिल पाई। आयुष ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने छापेमारी शुरू कर दी। पुलिस ने किडनी डोनेटर आयुष चौधरी और किडनी रिसीवर पारुल तोमर को मेड लाइफ से बरामद किया और हैलट PGI में भर्ती कराया है। रविवार को आहूजा हॉस्पिटल में मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। पारुल के पति का मेरठ में स्कूल है। पारुल परिवार ने शिवम को 7 लाख रुपए दिए थे। बाकी रुपए बाद में देने को कहा था। शिवम ने 3.50 लाख रुपए आयुष के खाते में डाले। 2.75 लाख आहूजा हॉस्पिटल को दिए, 25 हजार मेड लाइफ हॉस्पिटल को ट्रीटमेंट के लिए और 50 हजार रुपए उसने अपने पास रखे थे। आयुष ने शिवम से बाकी ढाई लाख रुपए मांगे तो विवाद हो गया। सोमवार को आयुष ने फोन पर पुलिस को मामले की जानकारी दे दी। प्रिंसिपल ने बताया- हमारे यहां PGI में इलाज नहीं है GSVM के प्रिंसिपल डॉक्टर संजय काला ने बताया- हमारे यहां PGI में किडनी ट्रांसप्लांट का इलाज नहीं किया जा सकता है। क्योंकि इस अस्पताल को किडनी ट्रांसप्लांट अभी तक एप्रूवल नहीं मिला है। हमारे यहां इस बीमारी की दवाइयां भी उपलब्ध नहीं है। किडनी रिसीवर पारुल तोमर और डोनेटर आयुष हमारे यहां ICU में सोमवार रात 10 बजे से एडमिट हैं। पारुल की हालत खराब होती जा रही है। पारुल का हीमोग्लोबिन 6.3 पहुंच गया है। यूरिन आउटपुट कम हो रहा है। वहीं आयुष की हालत स्थिर बताई जा रही है। लेकिन हमारे यहां इसका पूर्ण रूप से इलाज नहीं है। इस लिए लखनऊ के SGPGI में एडमिट करवाने के लिए पत्र लिखा है। मां-भाई से बात करने के गिड़गिड़ा रहा आयुष डॉक्टर संजय काला ने बताया हम आयुष और पारुल की हालत देखने के लिए गए थे। आयुष ने मुझसे अपने घर बात करने के लिए कहा- लेकिन पुलिस केस होने के कारण हम लोगों ने और वहां उपस्थित पुलिस बल ने परिवारिजनों से कोई बात नहीं करवाई। वहीं महिला के परिजनों का कोई भी पता नहीं चला है। न ही इन मरीजों का कोई तीमारदार आ है। किडनी गैंग का नेटवर्क- नेपाल, बांग्लादेश, बिहार तक कानपुर के इस किडनी गैंग का नेटवर्क बिहार, उत्तराखंड, झारखंड और नेपाल, बांग्लादेश तक है। ये लोग गरीब परिवार के लोग और स्टूडेंट को निशाना बनाते है। मोटी रकम का लालच देकर, टोकन मनी दे देते थे। गलियों में संचालित छोटे- छोटे नर्सिंग होम में किडनी ट्रांसप्लांट किया जा रहा है। जबकि शहर के बड़े अस्पतालों में भी इसका इलाज नहीं है।

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