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केक काटकर क्या राबड़ी आवास में लौटेंगे तेजप्रताप यादव:हार के बाद घर लौटना लालू के बड़े बेटे की मजबूरी, तेजस्वी क्यों करा सकते हैं एंट्री

चुनावी हार के बाद जिस तेजप्रताप यादव को परिवार से अलग-थलग माना जा रहा था, वही अब मां राबड़ी देवी का जन्मदिन मनाते दिखे। केक कटिंग की तस्वीरें, इमोशनल पोस्ट और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान। क्या ये सब महज पारिवारिक औपचारिकता है, या फिर लालू परिवार के भीतर दोबारा एंट्री की रणनीति? बिहार की राजनीति में सवाल गूंज रहा है—क्या मां के सहारे तेज प्रताप फिर से ‘घर में घुसने’ की कोशिश कर रहे हैं? जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में…। सवाल-1ः तेजप्रताप यादव क्या परिवार में लौटेंगे? जवाबः चुनाव हारने के बाद देर-सबेर तेजप्रताप यादव वापस परिवार और RJD में लौट सकते हैं। हालांकि, वह कई इंटरव्यू में कह चुके हैं कि मर जाना पसंद करूंगा, लेकिन वापस RJD में नहीं जाऊंगा। एक इंटरव्यू में तो उन्होंने गीता की कसम खाकर RJD में वापस नहीं जाने की बातें कही है। लेकिन राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। तेजप्रताप के परिवार में लौटने के 2 बड़े संकेत दिख रहे हैं… 1. तेजप्रताप 7 महीने बाद पहुंचे राबड़ी आवास पार्टी-परिवार से निकाले जाने के 7 महीने बाद कल यानी 1 जनवरी को तेजप्रताप को राबड़ी आवास पहुंचे। कल पूर्व मुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी का जन्मदिन था। ऐसे में तेजप्रताप यादव केक लेकर राबड़ी आवास पहुंचे और मां का बर्थ-डे मनाया। 2. चुनाव प्रचार में मां-बहन ने प्रचार नहीं, लेकिन समर्थन किया था तेजप्रताप यादव ने अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) बनाकर महुआ से विधानसभा चुनाव लड़ा था। वह चुनाव हार गए। छोटे भाई तेजस्वी यादव ने उनके खिलाफ प्रचार किया था। हालांकि, तेजप्रताप के समर्थन या खिलाफ में मां और बहन ने प्रचार तो नहीं किया, लेकिन आशीर्वाद जरूर दिया। मतलब परिवार के बाकी सदस्यों का सॉफ्ट कॉर्नर तेज प्रताप के प्रति दिखा। इसे 3 बयानों से समझिए… सवाल-2ः तेजप्रताप का परिवार और RJD में लौटना मजबूरी है क्या? जवाबः तेजप्रताप के पास भले अभी तेजस्वी की तरह मजबूत जनाधार नहीं है। और ना ही उनके पास अपना कोई राज्य स्तरीय संगठन है। 2025 विधानसभा चुनाव में तेजप्रताप यादव की पार्टी JJD 44 सीटों पर चुनाव लड़ी। एक भी सीट नहीं जीत पाई। खुद तेजप्रताप यादव चुनाव हार गए। परिवार से बाहर जाकर नहीं मिली है सफलता पिछले कुछ उदाहरण बताते हैं कि बड़े राजनीतिक परिवार से बाहर हुए नेताओं को कामयाबी नहीं मिली है और उन्हें वापस लौटना पड़ा है। जैसे… सवाल-3ः तेजस्वी क्यों तेजप्रताप का विरोध नहीं कर पाएंगे? जवाबः विधानसभा चुनाव में 25 सीटों पर सिमटने के बाद तेजस्वी यादव परिवार में बहुत मजबूत स्थिति में नहीं हैं। एक बहन और भाई बाहर परिवार और पार्टी से बाहर है। सहयोगी पार्टियां इशारों-इशारों में तेजस्वी पर निशाना साध रही है। लालू यादव की आत्मकथा ‘गोपालगंज टू रायसीना माय पॉलिटिकल जर्नी’ पुस्तक के लेखक नलिन वर्मा बताते हैं, ‘लालू यादव पिता के तौर पर सभी बच्चों को समान भाव से प्यार करते हैं। वह कभी नहीं चाहेंगे कि बच्चे अलग हों।’ मतलब यह कि अब तेजस्वी यादव को परिवार की बात माननी होगी। अगर परिवार एक हुआ तो वह बाकी मोर्चों पर मजबूती से लड़ सकते हैं। तेजप्रताप के आने से तेजस्वी को 2 बड़े फायदे हैं… 1. इमेज अच्छी होगी पॉलिटिकल एनालिस्ट अभिरंजन कुमार कहते हैं, ‘रोहिणी और तेजप्रताप के पूरे विवाद ने तेजस्वी यादव की इमेज को काफी नुकसान पहुंचाया है। अगर वह मैच्योर पॉलिटिशियन होते तो इस मामले को घर के अंदर सेटल कर लेते। लेकिन ऐसा नहीं कर पाए हैं। अब अगर और आगे बढ़ता है तो उनके इमेज को काफी नुकसान हो सकता है।’ वह बताते हैं, ‘परिवार के अंदर या बाहर कहीं भी तेजस्वी की लीडरशिप पर कोई सवाल नहीं था। बस भाई-बहनों की छोटी-छोटी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करना था, जिसमें तेजस्वी पूरी तरह फेल रहे।’ 2. यादव वोटबैंक नहीं बिखरेगा बिहार में यादव समाज की आबादी 14.26% है। तेजप्रताप यादव इसी समाज से आते हैं। बिहार की राजनीति में यादवों की ताकत का अंदाजा इस चुनाव में टिकट बंटवारे से भी लग जाएगा। दोनों मुख्य गठबंधनों NDA और महागठबंधन ने मिलकर 75 से ज्यादा यादव कैंडिडेट उतारे थे। सवाल-4ः लालू यादव ने तेजप्रताप को पार्टी और परिवार से कब बाहर निकाला? जवाबः 24 मई 2025 को तेजप्रताप यादव के फेसबुक अकाउंट से एक तस्वीर पोस्ट की गई थी। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद उस तस्वीर को डिलीट कर दिया गया। इसके बाद तेजप्रताप यादव ने रात 10:56 बजे X पर पोस्ट कर कहा कि हमारे सोशल मीडिया हैंडल को हैक कर लिया गया है और हमें बदनाम और परेशान करने की कोशिश की जा रही है। इसके अगले दिन 25 मई 2025 को लालू यादव ने तेजप्रताप को पार्टी और परिवार से बाहर निकाल दिया। लालू यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘निजी जीवन में नैतिक मूल्यों की अवहेलना करना हमारे सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक संघर्ष को कमजोर करता है। ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। इसलिए उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं। अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उसे पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया जाता है।


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