EPS-95 Pensioners अपनी प्रमुख मांगों को लेकर पिछले 10 वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। इसी क्रम में नेशनल एजिटेशन कमेटी (NAC) के तत्वावधान में आज जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया। संगठन के बुलढाणा (महाराष्ट्र) स्थित मुख्यालय में 24 दिसंबर 2018 से लगातार क्रमिक अनशन भी जारी है। पेंशनर्स ने अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए विभिन्न माध्यमों से कई बार प्रयास किए हैं। इसके बावजूद उनके मुद्दे अब तक अनसुलझे बने हुए हैं, जिससे पेंशनर्स में रोष व्याप्त है। देश के EPS-95 पेंशनर्स को मिलने वाली बेहद कम पेंशन राशि और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव के कारण उनकी मृत्यु दर बढ़ने की बात भी सामने आई है, जिसे पेंशनर्स ने गंभीर चिंता का विषय बताया। हाल ही में 9 से 11 मार्च 2024 तक जंतर-मंतर में चले राष्ट्रव्यापी आंदोलन के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की उदासीनता और बढ़ते रोष को देखते हुए पेंशनर्स ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री और केंद्रीय न्यासी बोर्ड के अध्यक्ष को भी संबोधित था। इससे पहले बसवराज बोम्मई की अध्यक्षता वाली श्रम, वस्त्र और कौशल विकास संबंधी स्थायी समिति ने EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन की तत्काल समीक्षा की सिफारिश की थी। समिति ने पेंशन को अधिक यथार्थवादी और गरिमापूर्ण स्तर तक बढ़ाने तथा वर्तमान जीवन-यापन की लागत के अनुरूप न्यूनतम पेंशन देने की बात कही थी। पेंशनर्स की प्रमुख मांगें 1. न्यूनतम पेंशन 7500 रुपये और उस पर महंगाई भत्ता मंजूर किया जाए। यह मांग कोश्यारी समिति (राज्यसभा याचिका 147) की सिफारिशों के अनुरूप बताई गई है।
2. सभी EPS-95 पेंशनर्स और उनके पति/पत्नी को मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी जाए।
3. जिन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को EPS-95 योजना में शामिल नहीं किया गया है, उन्हें 5000 रुपये मासिक पेंशन दी जाए।

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