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ओबरा–डी और अनपरा–ई ज्वाइंट वेंचर खत्म करने की मांग:तीन साल बाद भी नहीं शुरू हुआ काम, देरी से बढ़ रही लागत

ओबरा–डी और अनपरा–ई के 800–800 मेगावाट की ताप विद्युत परियोजनाओं का तीन साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो पाया। राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने फरवरी 2023 में एनटीपीसी के साथ ज्वाइंट वेंचर में इस परियोजना को शुरू करने का एमओयू किया था। देरी की वजह से लागत बढ़ गई है। इसकी वजह से सस्ती बिजली मिलने का सपना दूर होता जा रहा है। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सीएम योगी से तत्काल ज्वाइंट वेंचर समाप्त करने की मांग की है। समिति ने दोनों परियोजनाओं को राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपने की मांग की है। एनटीपीसी की अनदेखी से लटकीं परियोजनाएं लटकीं समिति का आरोप है कि फरवरी 2023 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान एनटीपीसी के साथ एमओयू साइन हुआ था। एनटीपीसी के उत्तरी क्षेत्र के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर दिवाकर कौशिक ने हाल ही में पेश की गई ग्रोथ ट्रांजैक्ट्री में इन दोनों परियोजनाओं का जिक्र तक नहीं किया। एनटीपीसी अब ग्रीन एनर्जी, न्यूक्लियर और अन्य प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही है। जबकि ताप विद्युत में मेजा ऊर्जा निगम (एनटीपीसी और यूपीआरवीयूएनएल का जेवी) की स्टेज-2 (3×800 मेगावाट) और सिंगरौली स्टेज-3 जैसी परियोजनाओं को तरजीह दी जा रही है। कोल पिटहेड लिंकेज न मिलने से महंगी पड़ेगी बिजली कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि कोल पिटहेड लिंकेज न मिलने से ये प्रोजेक्ट्स एनटीपीसी के लिए व्यावसायिक रूप से फायदेमंद नहीं रहे। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) से लिंकेज न मिलने पर 500-700 किमी दूर से कोयला लाना पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी और बिजली महंगी पड़ेगी। निगम को प्रोजेक्ट सौंपने पर 40–50 पैसे सस्ती बड़ेगी बिजली संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सामान्य तौर पर ऐसी ताप परियोजनाएं 5 साल में पूरी हो जाती हैं, लेकिन यहां तीन साल में काम ही शुरू नहीं हो पाया। यदि इन प्रोजेक्ट्स का उत्पादन निगम को सौंप दिया जाए तो पहले से मौजूद आधारभूत ढांचे और कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल से बिजली उत्पादन लागत में 40 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की कमी लाई जा सकती है। इससे प्रदेश को सस्ती और समयबद्ध बिजली मिल सकेगी। अलग स्वामित्व वाली परियोजनाओं से बढ़ेगा टकराव एक ही परिसर में अलग-अलग स्वामित्व वाली परियोजनाएं लगने से परिचालन में जटिलताएं, कोयला परिवहन में टकराव और ऐश डिस्पोजल जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। एक ही रेल लाइन और ऐश पॉन्ड होने से विवाद बढ़ने का खतरा है। कर्मचारियों के उत्पीड़न पर सत्याग्रह की चेतावनी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा बिजली इंजीनियरों, जूनियर इंजीनियरों और कर्मचारियों के बड़े पैमाने पर निलंबन के निर्देशों के खिलाफ संघर्ष समिति ने सामूहिक सत्याग्रह की चेतावनी दी है।

Source: Dainik Bhaskar via DNI News (Prayagraj)

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