लखनऊ में साइबर जालसाजों ने वित्त विभाग से रिटायर्ड अफसर को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 25 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान उनसे 90 लाख रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए। मामले की जानकारी होने पर उनके बेटे ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने जालसाजों के खातों में मौजूद 15 लाख रुपए फ्रीज करा दिए हैं। साइबर थाना इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव ने बताया कानपुर रोड एलडीए कॉलोनी सेक्टर-जी निवासी अमरजीत सिंह (73) वित्त विभाग से रिटायर्ड अफसर हैं। उनके बेटे अमरप्रीत सिंह बेंगलुरु में नौकरी करते हैं। एक दिसंबर को अमरजीत सिंह को वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई साइबर क्राइम सेल का अफसर गिरीश कुमार बताया। जालसाज ने बोला कि अमरजीत सिंह मनी लॉन्ड्रिंग केस में शामिल हैं। उनके खिलाफ मुंबई के साइबर थाने में मुकदमा दर्ज है और गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। विरोध करने पर उन्हें और पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी दी गई। व्हाट्सऐप पर कोर्ट का फर्जी वारंट भेजा गया। जिसे देखकर बुजुर्ग अफसर डर गए। इसके बाद जालसाजों ने उनके बैंक खातों और आर्थिक स्रोतों की पूरी जानकारी ले ली। खुद को हिरासत में लेने का दावा करते हुए कहा गया कि जांच के नाम पर एक करोड़ रुपए ट्रांसफर करने होंगे। जांच पूरी होने पर रकम वापस कर दी जाएगी। डर के चलते अमरजीत सिंह ने यूपीआई, आरटीजीएस और एफडी तुड़वाकर जालसाजों के बताए खातों में करीब 90 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। बेटे को हुआ शक, तब खुला राज अमरजीत सिंह ने डिजिटल अरेस्ट की बात किसी को नहीं बताई। 25 दिसंबर को वह छत पर घबराए हुए फोन पर बात करते दिखे तब बेटे अमरप्रीत को शक हुआ। पूछताछ पर टालमटोल करते रहे। उसी शाम एक पारिवारिक कार्यक्रम से लौटते समय भी उनकी घबराहट बनी रही। घर पहुंचने पर दबाव बनाने पर पूरी सच्चाई सामने आई। कई राज्यों के खातों में भेजी गई रकम पुलिस जांच में सामने आया कि जालसाजों ने कई राज्यों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कराए। आशंका है कि अधिकतर खाते ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड के हैं। फिलहाल जालसाजों के खातों में मौजूद 15 लाख रुपए फ्रीज कराए जा चुके हैं। अन्य खातों की पड़ताल जारी है।
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